भीमा कोरेगांव मामला: गौतम नवलखा को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, खारिज हुई जमानत याचिका
नई दिल्ली, मई 12। सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की जमानत अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने भीमा कोरेगांव से संबंधित कथित एल्गार परिषद-माओवादी मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। आपको बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए गौतम नवलखा ने 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई
गौतम नवलखा ने विशेष अदालत के समक्ष भी जमानत की याचिका दायर की थी, जो कि स्वीकार नहीं की गई। इसके बाद 8 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी जमानत याचिका खारिज कर दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस दौरान कहा था कि उन्हें विशेष अदालत के फैसले में दखल देने कोई उचित कारण नहीं दिख रहा है। शीर्ष अदालत ने जमानत याचिका पर 26 मार्च को ही फैसला सुरक्षित रखा था। बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नवलखा की याचिका पर न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की एक पीठ ने अपना फैसला सुनाया है।
याचिका में नवलखा का दावा
अपनी याचिका में नवलखा ने दावा किया था कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भीमा-कोरेगांव मामले में 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर अपनी चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही है। इसी आधार पर उन्होंने जमानत की अर्जी लगाई थी जो सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो गई है। आपको बता दें कि, नवलखा पर प्रतिबंधित संगठन - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के साथ कथित संबंधों के लिए गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कड़े आरोप लगाए गए हैं।
माओवादी संगठनों से संबंध का आरोप
पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एल्गार परिषद की बैठक में नवलखा द्वारा कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया गया था। इस भाषण के बाद भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। पुलिस ने यह भी आरोप लगाए हैं कि कार्यक्रम को कुछ माओवादी संगठनों का भी समर्थन मिला हुआ था। फिलहाल, NIA इस पूरे मामले की जांच कर रही है।












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