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SC ने तोड़े Jet Airways के दोबारा शुरू होने की उम्मीदों के सपने! जानें कैसे हुआ भारत की प्रमुख एयरलाइन का पतन?

Jet Airways Liquidation News: लगभग चार साल से बंद पड़ी Jet Airways के दोबारा शुरू होने की संभावना को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने खत्म कर दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को कंपनी के परिसमापन (कंपनी की संपत्तियों को बेचकर उससे मिलने वाले पैसे से कर्ज और देनदारी चुकाने की प्रक्रिया) का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के फैसले को पलटते हुए दिया, जिसमें जेट एयरवेज का स्वामित्व जालान कालरॉक कंसोर्टियम (JKC) को सौंपा गया था।

Jet Airways Liquidation News

परिसमापन का आदेश क्यों हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जालान-कालरॉक कंसोर्टियम ने 350 करोड़ रुपये की पूंजी देने का वादा किया था, जिसमें से 150 करोड़ रुपये एयरलाइन के कर्मचारियों के बकाया, हवाई अड्डे के बकाया और अन्य खर्चों के लिए देने थे। JKC इस राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा। इससे यह स्पष्ट हो गया कि कंसोर्टियम एयरलाइन के पुनरुद्धार की योजना को लागू करने में विफल हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिसमापन का निर्णय जेट एयरवेज के ऋणदाताओं और कर्मचारियों के हित में होगा।

NCLAT के फैसले को SC ने ठहराया गलत
सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के फैसले को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि JKC की तरफ से 150 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी को मंजूरी देने का NCLAT का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2023 के आदेश की अवहेलना करता है। कोर्ट ने NCLT, मुंबई को निर्देश दिया कि वह परिसमापक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करे, ताकि जेट एयरवेज की संपत्तियों का निपटान हो सके।

घाटे के संकट ने कतरे जेट के पर!
1993 में नरेश गोयल द्वारा शुरू की गई Jet Airways एक समय भारत की प्रमुख एयरलाइनों में से एक थी। लेकिन, कंपनी वित्तीय संकटों में फंसती चली गई और आखिरकार अप्रैल 2019 में बंद हो गई। इसके बंद होने के बाद कंपनी को दिवालियापन प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिसमें NCLT ने JKC को पुनरुद्धार का मौका दिया था।

कंसोर्टियम का दावा था कि कंपनी के स्वामित्व का ट्रांसफर नहीं हो रहा है क्योंकि बैंक इस प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं, वहीं ऋणदाताओं का कहना था कि JKC ने अभी तक पूंजी का भुगतान नहीं किया है। इस विवाद के चलते कंपनी का पुनरुद्धार अधर में लटका रहा, और अब सुप्रीम कोर्ट के परिसमापन के आदेश से इसके दोबारा शुरू होने की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई है।

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Jet Airways का सफर: ऊंचाइयों से बंद होने तक

  • Jet Airways ने 1993 में दो विमानों से अपनी यात्रा शुरू की थी। इसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू कीं और एक समय भारत की अग्रणी एयरलाइनों में गिनी जाने लगी। लेकिन, 2012 के बाद से इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी सस्ती एयरलाइनों से प्रतिस्पर्धा भी शामिल थी।
  • 2013 में एतिहाद एयरवेज ने जेट में 24% हिस्सेदारी खरीदी थी, लेकिन इससे भी कंपनी की वित्तीय हालत नहीं सुधरी। 2019 में बढ़ते कर्ज और घाटे के चलते नरेश गोयल को कंपनी के चेयरमैन पद से इस्तीफा देना पड़ा। अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज ने अपनी आखिरी उड़ान भरी और इसके साथ ही यह एयरलाइन बंद हो गई।

Jet Airways के पतन का कारण

  • गंभीर वित्तीय संकट: कंपनी बढ़ते घाटे और कर्ज में फंसती गई।
  • प्रतिस्पर्धा का सामना करने में नाकामी: सस्ती एयरलाइनों से मुकाबले में जेट पीछे रह गई।
  • गलत निवेश और कर्ज पर निर्भरता: नरेश गोयल ने कंपनी को कर्ज के सहारे चलाने की कोशिश की।
  • प्रबंधन में कमी: कंपनी के अधिकारियों पर नरेश गोयल का विश्वास कम था, जिससे प्रबंधन पर असर पड़ा।

Jet Airways के दोबारा शुरू होने की उम्मीदें खत्म
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एयरलाइन के लिए अंतिम धक्का साबित हुआ है। परिसमापन का आदेश कंपनी के लिए पुनरुद्धार की संभावनाओं का अंत कर देता है। NCLT अब परिसमापक नियुक्त करेगा जो Jet Airways की संपत्तियों को बेचकर कर्जदारों और कर्मचारियों के बकाया को चुकाएगा। इस फैसले से यह साफ है कि Jet Airways का आसमान में वापस उड़ान भरने का सपना अब खत्म हो चुका है।

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