Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

JAS-39 Gripen: ब्राजील में राफेल फाइटर जेट को 'गिराया', अब भारतीय MRFA Deal पर Saab की नजर, खरीदेगी वायुसेना?

JAS-39 Gripen: भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के नए प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Mk1A और Mk2 में देरी को देखते हुए मीडियम-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) को खरीदने के संकेत दिए हैं।

वहीं, स्वीडिश विमान निर्माता SAAB ने कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर सिर्फ तीन साल के भीतर पहला ग्रिपेन ई/एफ (Gripen E/F) देने की आकर्षक पेशकश की है। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए, साब कैम्पेन डायरेक्टर और भारत कार्यक्रम के लिए ग्रिपेन के प्रमुख (बिजनेस एरिया एयरोनॉटिक्स) केंट-एके मोलिन ने जोर देकर कहा, कि स्वीडिश फर्म पहले से ही टेक्नोलॉजी के 100 फीसदी ट्रांसफर के साथ स्थानीय और वैश्विक बाजारों की सेवा के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग अवसरों की तलाश कर रही है।

JAS-39 Gripen

भारतीय वायुसेना को लुभाने की कोशिश

उन्होंने कहा, कि "हमें लगता है, कि हम भारत में पूर्ण पैमाने पर उत्पादन स्थापित कर सकते हैं, जिसमें न केवल एयरफ्रेम, बल्कि सिस्टम और सॉफ्टवेयर भी शामिल होंगे। हमारे पास प्लेटफॉर्म को तेजी से स्वदेशी बनाने की योजना है। हमने कई निजी भागीदारों के साथ अनुकूल चर्चा की है, जो हमारे स्वदेशीकरण प्रयासों में हमारा समर्थन करेंगे।"

स्वीडिश सहायक कंपनी SAAB की भारतीय शाखा, जो सिंगल-इंजन ग्रिपेन फाइटर जेट बनाती है, तब से वायुसेना को डोरे डालने में लगी है, जब से IAF ने 114 फाइटर जेट खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। पिछले साल इसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट से एक बयान जारी करते हुए इंडियन एयरफोर्स को अपने एडवांस ग्रिपेन-ई प्लेटफॉर्म की सार्वजनिक रूप से पेशकश की थी।

एयरफोर्स को है तत्काल विमानों की जरूरत

IAF ने MRFA के तहत 114 फाइटर जेट के अधिग्रहण के लिए 2018 में 'सूचना के लिए अनुरोध' जारी किया था, लेकिन पिछले छह वर्षों से इस पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। एयरफोर्स अब इसके लिए टेंडर जारी करने से पहले भारत सरकार से आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) का इंतजार कर रही है।

इस बीच, IAF के फाइटर जेट स्क्वाड्रन की ताकत तेजी से घट रही है, और नए वायुसेना प्रमुख ने तो यहां तक कह दिया है, कि वायुसेना को "कल से ही" विमानों की जरूरत थी।

वहीं, मोदी सरकार के स्वदेशीकरण पर जोर देने के साथ, "मेक इन इंडिया" के समर्थक यह तर्क दे रहे हैं, कि भले ही भारतीय वायुसेना आज MRFA सौदे पर हस्ताक्षर कर दे, लेकिन उसे यह विमान अगले 6-7 वर्षों में ही मिले पाएगा और तब तक LCA Mk2 भी तैयार हो जाएगा।

वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद अपनी पहली वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर चीफ मार्शल सिंह से पूछा गया, कि भारतीय वायुसेना को एमआरएफए की क्या जरूरत है, जबकि एलसीए एमके2 6-7 वर्षों में तैयार हो जाएगा और विदेशी विक्रेता को पहला एमआरएफए देने में उतना ही समय लगेगा।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सवाल का जवाब देते हुए, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा: "पूरी आपूर्ति आने में सात साल लगते हैं। जहां तक ​​एलसीए एमके2 का सवाल है, 2027 वह समय है जब रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टेज समाप्त हो जाएगा, और उसके बाद उत्पादन चरण शुरू होगा। एलसीए की डिलीवरी 2016 में शुरू हुई थी, उस वक्त मैं एएसटीई में तैनात था, जब पहली बार इसे शामिल किया गया था। आज 2024 है, और हमारे पास 38 विमान हैं।"

एयरफोर्स ने 'मेक इन इंडिया' नीति के तहत एमआरएफए हासिल करने पर सहमति जताई है, जहां विमान का भारत में लाइसेंस-उत्पादन किया जाएगा। चीफ का कहना है, कि इससे भारतीय वायुसेना को जरूरत पड़ने पर विमान में अपग्रेड और संशोधन करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जगुआर का उदाहरण दिया, जिसका निर्माण भारतीय विमान निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने किया है।

भारतीय वायुसेना प्रमुख के इस बयान से उन अटकलों पर भी विराम लग गया, कि एमआरएफए सौदा रद्द कर दिया गया है।

JAS-39 Gripen

Gripen-E फाइटर जेट के फायदे क्या हैं?

सिंगल-इंजन ग्रिपेन ई इस रेस में शामिल सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान है। इसके हथियार, जिसमें मेटियोर बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल भी शामिल है, वो भारतीय वायुसेना को अपने विरोधियों के खिलाफ बढ़त दिलाएंगे।

वहीं, इसमें लगा लेटेस्ट उच्च-प्रदर्शन सेंसर, जैसे कि एईएसए रडार, आईआरएसटी सिस्टम, एडवांस डेटालिंक और एआई-सक्षम निर्णय समर्थन, पायलट को बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता और पहले देखने और पहले एक्शन लेने की क्षमता प्रदान करते हैं।

ग्रिपेन-ई अपनी एडवांस इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, मजबूत मिसाइलों को इसमें रखने, कम रडार क्रॉस-सेक्शन और कम ऑपरेशनल लागत के मामले में बहुत आकर्षक है, लेकिन जेट अभी भी दो महत्वपूर्ण मोर्चों पर अपने प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ता हुआ दिख रहा है, पहला राजनीतिक प्रभाव और दूसरा आर्थिक समर्थन। भारतीय वायुसेना भी सिंगल इंजन वाले विमान के लिए उत्सुक नहीं है।

ग्रिपेन ई नौ मिसाइलों और 16 बमों के साथ-साथ अन्य हथियारों और पेलोड का एक बड़ा सेट ले जा सकता है। विमान का डिजाइन, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लेकर टोही और भारी पेलोड के साथ हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियारों तक, सभी मिशनों के लिए नए हथियार प्रणालियों और स्टोर करने में सक्षम है।

फिलहाल, भारतीय वायुसेना के लिए राफेल एक मजबूत दावेदार प्रतीत होता है, भले ही भारतीय वायुसेना पांचवीं पीढ़ी के विकल्पों की तलाश कर रही हो। विभिन्न प्लेटफॉर्म के साथ भारतीय नौसेना पर हावी होने के बाद अमेरिका, भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जेट इकोसिस्टम में प्रवेश करने के लिए बहुत उत्सुक है। साब एक अंडरडॉग है, लेकिन इसने ब्राजील के लड़ाकू सौदे के लिए डसॉल्ट राफेल को चौंका दिया। लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह भारत में भी कुछ ऐसा ही कर सकता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+