IT एक्ट की धारा रद्द होने के बाद भी केस दर्ज होने पर SC नाराज, कहा- केंद्र कुछ करे, वरना हम कार्रवाई करेंगे
IT एक्ट की धारा रद्द होने के बाद भी केस दर्ज होने पर SC नाराज, कहा- केंद्र कुछ करे, वरना हम कार्रवाई करेंगे
नई दिल्ली, 05 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (05 जुलाई) को आईटी अधिनियम की धारा 66 ए के तहत 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए जाने पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईटी एक्ट की धारा रद्द होने के बाद भी केस दर्ज होना चौंकाने वाला, आश्चर्यजनक और परेशानी भरा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह जल्द ही इस मामले पर कुछ करें वरना वह कार्रवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह एक विवादास्पद कानून है, जिसने पुलिस को "आपत्तिजनक" सामग्री ऑनलाइन पोस्ट करने के लिए लोगों को गिरफ्तार करने की अनुमति दी थी, क्योंकि ये हटा दी गई थी।

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24 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66A को खत्म कर दिया था
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च, 2015 को धारा 66ए को खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल मामले में इस धारा को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। जस्टिस आर नरीमन, केएम जोसेफ और बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा है कि आईटी अधिनियम की धारा 66 ए रद्द होने के बाद भी केस दर्ज होना, वो भी इतनी बड़ी संख्या में चौंकाने वाला है। हम नोटिस जारी करेंगे। न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा ये जो हो रहा है, वह हैरान करने वाला और भयानक है।
याचिका में की गई है ये मांग
सुप्रीम कोर्ट एनजीओ पीपुल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में पीयूसीएल ने केंद्र को इस कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के खिलाफ सभी पुलिस स्टेशनों को सलाह देने के निर्देश की मांग की है। याचिका में साफ-साफ मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि देश के किसी भी पुलिस थाने में इस धारा के तहत एफआईआर दर्ज ना हो।












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