मानसिक बीमारी के इलाज के लिए बीमा को लेकर SC ने केंद्र को भेजा नोटिस
नई दिल्ली। रविवार को बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि वो मानसिक तनाव में थे। सुशांत की मौत के बाद से अब मानसिक बीमारी को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बीमा कंपनियों पर निगरानी रखने वाली संस्था IRDA से पूछा है कि आखिर मानसिक रूप से बीमार मरीजों को बीमा क्यों नहीं दिया जा रहा है?
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वकील गौरव कुमार बंसल की जनहित याचिका में बीमा कंपनियों को मानसिक बीमारी के रोगियों के इलाज के लिए चिकित्सा बीमा का विस्तार करने के लिए उचित निर्देश देने की मांग की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 हफ्तों में जवाब देने को कहा है। आपको बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की चार बीमा कंपनियों ने जुलाई 2019 तक एक लाख लोगों को मानसिक रोग से संबंधित बीमा कवर उपलब्ध कराया था।
29 मई 2018 से मानसिक स्वास्थ्य सेवा कानून, 2017 लागू हुआ था। इस कानून के तहत प्रावधान है कि सभी बीमा कंपनियों को मानसिक बीमारी के इलाज के लिए अन्य बीमारियों की तरह ही चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराना होगा। अन्य बीमारियों में जिस आधार पर बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है, मानसिक रोग भी उसी आधार पर कवर उपलब्ध कराना होगा। अगस्त, 2018 में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों से कानून के इस प्रावधान का अनुपालन करने को कहा था।
वहीं दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के शोधकर्ताओं ने कहा चेतावनी देते हुए कहा है सोशल डिस्टेंसिंग का ज्यादा दिनों तक पालन करने से किशोरों में कई मानसिक व व्यवहार संबंधी समस्याएं पनप सकती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि 10 साल से 24 साल की उम्र के बीच आमने-सामने होने वाले सामाजिक संपर्क दिमाग के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। स्कूल और कॉलेज बंद रहने के कारण किशोरों में तनाव बढ़ रहा है। महामारी के दौरान दोस्तों से दूर रहने की की पीड़ा को सोशल मीडिया, वीडियो चैट आदि में काफी तक दूर किया है।












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