राजद्रोह कानून: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को बड़ा झटका, वैधता की जांच पर सुनवाई स्थगित करने से इंकार
Sedition Law: सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून की वैधता की जांच को फिलहाल स्थगित करने के केंद्र के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने नए बिल का हवाला देकर कहा कि नया बिल एक स्थायी समिति के समक्ष विचार के लिए लंबित है, इसलिए फिलहाल सुनवाई टाल दी जाए। इस पर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि भले ही नया विधेयक कानून बन जाए, लेकिन नए कानून का पिछले मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले की सुनवाई 5 जजों की संविधान पीठ करेगी। यह पीठ 1962 के केदारनाथ फैसले की समीक्षा करेगी। इस फैसले में IPC की धारा 124A को वैध ठहराया गया था। वहीं सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने नए प्रस्तावित आपराधिक कानून के पास होने तक इंतजार के लिए कहा। इस पर कोर्ट ने कहा कि नया कानून आ जाने पर भी IPC की धारा 124A के तहत दर्ज मुकदमे खत्म नहीं होंगे। इसलिए, उसकी वैधता पर सुनवाई जरूरी है।

राजद्रोह कानून को क्यों दी गई चुनौती
बता दें कि धारा 124ए (राजद्रोह कानून) की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में यह धारा 19(1)(ए) के दायरे से बाहर है। वहीं केंद्र सरकार ने इस मामले पर फिलहाल सुनवाई टालने की मांग की थी लेकिन अदालत ने उस मांग को ठुकरा दिया है।
राजद्रोह कानून को खत्म करने के लिए लाया गया था बिल
दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त 2023 को लोकसभा में 163 साल पुराने 3 कानूनों में बदलाव के लिए बिल पेश किया। इसमें राजद्रोह कानून खत्म करना भी शामिल है। इस बिल में राजद्रोह कानून को हटाकर देशद्रोह कानून करने पर बात की गई है। इसके अलावा इसे पहले से अधिक कठोर बनाने का प्रावधान किया गया है।












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