50 फीसदी VVPAT के EVM से मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों से मांगा जवाब
नई दिल्ली। वीवीपैट को लेकर 21 विपक्षी दलों ने जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी उसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों से एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। दरअसल इन सभी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कहा था कि 50 फीसदी ईवीएम के नतीजों को वीवीपैट से मिलाया जाए। विपक्षी दलों की इस मांग का चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों को एक हफ्ते के भीतर उनका जवाब दायर करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।

कोर्ट में चुनाव आयोग ने शपथ पत्र दिया है उसमे कहा गया है कि अगर विपक्ष की मांग को स्वीकार किया जाता है तो चुनाव के परिणाम घोषित करने में छह दिन का विलंब होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि हम अपने पुरानी पद्धति को ही अपनाना चाहते हैं, किसी भी वीवीपैट के आंकड़े का ईवीएम से मिलान किया जाएगा। मौजूदा पद्धति को वृहद शोध के बाद अपनाया गया है, इस दौरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया था
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि कुल 400 से अधिक पोलिंग स्टेशन हैं, ऐसे में इन सभी जगहों की वीवीपैट स्लिप की गिनती में 8-9 दिन का समय लग सकता है। वहीं विपक्षी दलों की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 50 फीसदी वीवीपैट मशीनों की पर्ची की गिनती निष्पक्ष और सही चुनाव के पक्ष में है, जोकि संविधान का मूलभूत ढांचा है। बता दें कि जिन विपक्षी दलों ने यह याचिका दायर की थी उसमे टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू, एनसीपी के शरद चंद्र पवार, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन, एलजेडी के शरद यादव, एसपी के अखिलेश यादव, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके के एमके स्टालिन, आप के अरविंद केजरीवाल, एनसी के फारुक अब्दुल्ला शामिल हैं।












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