जामनगर में बन रहे अंबानी के मालिकाना हक वाले दुनिया के सबसे बड़े चिड़ियाघर को SC से मिली हरी झंडी

जामनगर में बन रहे अंबानी के मालिकाना हक वाले दुनिया के सबसे बड़े चिड़ियाघर को SC से मिली हरी झंडी

नई दिल्ली, 22 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा बनाए जा रहे चिड़ियाघर को दी गई अनुमति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनौती देने वाली जनहित याचिका में कोई तर्क या आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर द्वारा जानवरों के अधिग्रहण पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले एक वकील द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता कन्हैया कुमार ने ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के प्रबंधन में एक एसआईटी के गठन की भी मांग की गई थी।

 Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपत्तियों में कोई दम नहीं है

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस कृष्णा मुरारी ने कहा कि इस तरह आपत्तियों में कोई दम नहीं है और अगर कोई कंपनी निजी चिड़ियाघर बनाना चाहती है तो उसको किस आधार पर रोका जाए। बता दें कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जामनगर में ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर बनाने की घोषणा की है, जिसमें भारत और विदेशों से जानवर लाकर रखे जाएंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज इसे दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर बनाने जा रही है।

'इसको बनाने में कोई कानूनी खामी नहीं है'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात पर विवाद की कोई गुंजाइश नहीं है कि ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर एक मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर होने के साथ-साथ एक रेस्क्यू सेंटर भी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा चिड़ियाघर और बचाव केंद्र को मान्यता प्रदान करने में कोई कानूनी खामी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसा लगता है बिना रिसर्च के याचिका डाली गई

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा, ''याचिकाकर्ता के प्रतिवादी संख्या 2 की ओर से विशेषज्ञता की कमी या व्यावसायीकरण के संबंध में आरोप अनिश्चित हैं और ऐसा नहीं लगता है कि याचिकाकर्ता ने इस अदालत को जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र में ले जाने से पहले जरूरी रिसर्च किया है।''

पीठ ने कहा, "हमें यह देखने के लिए मजबूर किया जाता है कि याचिकाकर्ता खुद इस क्षेत्र का विशेषज्ञ नहीं है और उसने याचिका को केवल समाचार-रिपोर्टों के आधार पर ही पेश किया है। याचिका देखकर लगता है कि ये किसी विशेषज्ञ द्वारा तैयार नहीं की गई है। ऐसे किसी भी मामले में, विषय क्षेत्र का ध्यान रखा जाना चाहिए, जो इस याचिका में नहीं रखा गया है। प्रतिवादी संख्या 1 (केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण) की देखरेख में है, और इसकी ओर से कोई दुर्बलता प्रतीत नहीं होती है, जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का आह्वान नहीं किया जा सकता है।

मुकेश अंबानी ने कुछ दिनों पहले इस बात की घोषणा की थी कि वो चिड़ियाघर अपने गृह राज्य यानी गुजरात में बनवाने जा रहे हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर होगा। इसकी जानकारी देते हुए रिलायंस में कॉरपोरेट अफेयर्स डायरेक्टर परिमल नाथवानी ने कहा था, 'मुकेश अंबानी जो चिड़ियाघर बनवाने जा रहे है वो साल 2023 में खुलने की उम्मीद है।

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