सुप्रीम कोर्ट ने Mahakumbh Stampede को बताया 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना', भगदड़ को लेकर याचिका खारिज
Supreme Court on Mahakumbh Stampede: प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या की सुबह हुई भगदड़, मौतों और संगम तट व्यवस्थाओं को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया। सोमवार को याचिका का डिस्पोजल करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी की ओर से महाकुंभ भगदड़ को लेकर दायर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ पर स्टेटस रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई। याचिका में मांग की गई कि सभी राज्यों की ओर से मेले में सुविधा केंद्र खोलने की भी बात कही गई है, जिससे गैर हिंदी भाषी नागरिकों को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो।

सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने याचिका सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मांगों पर विचार करने से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा।
महाकुंभ में बसंत पंचमी के दिन अंतिम अमृत स्नान शुरू हो गया। अखाड़े के साधु-संत संगम में डुबकी लगा रहे हैं। यह 13 अखाड़ों का तीसरा और अंतिम अमृत स्नान हो रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर अमृत स्नान की व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रातः साढ़े तीन बजे से अपने सरकारी आवास स्थित वॉर रूम में बैठक की।
एक अनुमान के मुताबिक, सोमवार को पांच करोड़ लोगों के स्नान करने की संभावना है। ऐसे में स्थिति पर सीएम योगी खुद निगरानी कर रहे हैं। सीएम ने डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ लगातार अपडेट प्राप्त किए और आवश्यक निर्देश दिए। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को सुबह चार बजे तक 17 लाख से अधिक लोगों ने डुबकी लगा ली। बता दें कि 13 जनवरी से अभी तक महाकुंभ में करीब 35 करोड़ लोग गंगा और संगम में स्नान कर चुके हैं।












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