सुप्रीम कोर्ट ने GRAP-4 से GRAP-2 तक शिथिलता की दी अनुमति, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए GRAP के चौथे चरण के सख्त उपायों को घटाकर दूसरे चरण पर लाने की अनुमति दी है। यह निर्णय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित एजेंसियों के आंकड़ों के आधार पर लिया गया। जिसमें दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 161 के साथ मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया।
हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को निर्देश दिया है कि यदि AQI 350 या 400 से अधिक पहुंचता है तो वह तुरंत चरण 3 या 4 के प्रतिबंध लागू करे। अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि GRAP चरण 2 के तहत मौजूदा उपायों से किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाए।

GRAP-3 के कुछ उपायों को चरण 2 में शामिल करने का सुझाव
न्यायालय ने वायु गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के लिए सिफारिश की है कि CAQM चरण 3 के कुछ उपायों को चरण 2 के मौजूदा प्रतिबंधों में शामिल करे। यह निर्देश अदालत की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वायु गुणवत्ता में सुधार को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाए।
वायु गुणवत्ता में हुआ सुधार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के 38 निगरानी स्टेशनों में से केवल छह ने AQI को खराब श्रेणी में दर्ज किया। जबकि अधिकांश स्थानों पर वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में रही। CPCB के मानकों के अनुसार 101 से 200 के बीच का AQI मध्यम श्रेणी में आता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी सकारात्मक पूर्वानुमान दिए हैं। गुरुवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.0 डिग्री कम 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। IMD ने अगले कुछ दिनों तक मुख्य रूप से साफ आसमान और अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई है।
न्यायालय की सख्ती और सुधार के संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता पर गिरावट की स्थिति में CAQM को तुरंत कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रतिबंधों में ढील केवल सुधार की स्थिति में दी जाए और गिरावट पर तुरंत सख्ती की जाए।
दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु के प्रयास जारी
GRAP 4 से GRAP 2 तक शिथिलता का यह निर्णय, वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण की स्थिति के साथ प्रतिबंधों का संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है। दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वायु सुनिश्चित करने के लिए ये कदम सरकार और न्यायालय के साझा प्रयासों को दर्शाते हैं।












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