कौन हैं जज प्रेम कुमार? मोची पिता व मां ने मजदूरी करके पढ़ाया, क्‍यों चली गई थी नौकरी? सुप्रीम कोर्ट से बहाल

Judge Prem Kumar: सुप्रीम कोर्ट की सख्‍त टिप्‍पणी के बाद भारतीय न्‍यायपालिका में पंजाब के एडीजे प्रेम कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह प्रेम कुमार की बर्खास्‍तगी का मामला है। 'संदिग्‍ध निष्‍ठा' के नाम पर एडीजे प्रेम कुमार की नौकरी चले जाने व बहाली के बाद अब उनकी सक्‍सेस स्‍टोरी सामने आई है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने पंजाब एडीजे प्रेम कुमार की बर्खास्‍तगी के मामले में सुनवाई के दौरान ओपन कोर्ट में टिप्‍पणी करते हुए कहा कि 'ऊंचे समुदाय के लोग बर्दाश्‍त ही नहीं कर पा रहे थे कि उपेक्षित समुदाय के व्‍यक्ति का लड़का (मोची) कम उम्र में जज बन गया और उनके बीच आ गया।'

Prem Kumar ADJ Punjab

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि 'मुझे यह कहने में गुरेज नहीं कि प्रेम कुमार परिस्थितियों और जातिगत पक्षपात का शिकार हुआ है। सब पहले से फिक्‍स था। एक जज जिसका आचारण लगातार अच्‍छा था। उसे एक अपराधी की शिकायत पर 'संदिग्‍ध निष्‍ठा' वाला बता दिया गया।'

Who is Prem Kumar ADJ Punjab: जज प्रेम कुमार बरनाला के रहने वाले

जज प्रेम कुमार पंजाब के बरनाला के रहने वाले हैं। पिता ने मोची का काम और मां मजदूरी करके बेटे को पढ़ाया। प्रेम कुमार ने 25 अप्रैल 2014 को अन्‍य 13 नए जजों के साथ नियुक्ति मिली थी। प्रेम कुमार ने अमृतसर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में अतिरिक्त अधिकारी के रूप में ज्‍वाइन किया था।

जज प्रेम कुमार को किस मामले में बर्खास्त किया गया था?

एडीजे प्रेम कुमार अमृतसर जिला कोर्ट में नियुक्‍त हुए थे तब दुष्‍कर्म के मामले में आरोपी की शिकायत के बाद 'संदिग्‍ध निष्‍ठा' मानते हुए बर्खास्‍त किया गया था। आरोपी ने शिकायत दी थी कि प्रेम कुमार ने वकालत करते वक्‍त दुष्‍कर्म पीड़िता को 1.50 लाख रुपए दिलवाए।

हाई कोर्ट ने विजिलेंस जांच शुरू की। इसके आधार पर जज प्रेम कुमार की एसीआर 'ईमानदारी संदिग्‍ध' दर्ज कर दी गई और फिर साल 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की फुल बेंच ने शिकायत के आधार पर प्रेम कुमार को बर्खास्‍त कर दिया था।

हाई कोर्ट ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

बर्खास्‍तगी के फैसले को प्रेम कुमार ने चुनौती दी तो जनवरी साल 2025 में सबूतों की कमी का हवाला देते हुए बर्खास्‍तगी रद्द कर दी गई है। हाई कोर्ट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में कहा कि जज प्रेम कुमार की बर्खास्‍तगी गलत थी, उनको बहाल किया जाए। साथ ही सभी लाभ दिए जाएं।

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