कौन हैं लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी? कैसे तय किया ब्यूटी क्वीन से आर्मी अफसर तक सफर, ठुकरा चुकी हैं बड़ा ऑफर

Success Story Kashish Methwani: कभी मिस इंटरनेशनल इंडिया 2023 का ताज पहन चुकी कशिश मेथवानी आज भारतीय सेना की वर्दी में दिखती हैं। लंबे बालों और रैंप वॉक की चमक-धमक अब उनकी पहचान नहीं, बल्कि अब वे लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी हैं, जिन्होंने आर्मी एयर डिफेंस (AAD) में कमीशन हासिल किया है। 6 सितंबर को हुए पासिंग-आउट परेड के बाद उन्होंने आधिकारिक तौर पर सेना की वर्दी पहनी, जिसके बाद से फिर से वो एक बार सोशल मीडिया पर सुर्खियों हैं।

कशिश की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। जहां आमतौर पर लोग एक ही क्षेत्र में करियर चुनते हैं, वहीं उन्होंने अपनी जिंदगी में "या तो-या फिर" की जगह "और" चुना। वे मिस इंडिया भी बनना चाहती थीं, साइंटिस्ट भी, और आर्मी ऑफिसर भी। और उन्होंने यह सब हासिल कर दिखाया है।

Success Story Kashish Methwani

24 साल की उम्र में कशिश ने जितनी उपलब्धियां हासिल कीं, वे किसी भी युवा के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कहानी इस बात की गवाही देती है कि अगर आप ठान लें, तो मॉडलिंग, साइंस और आर्मी-तीनों में एक साथ सफल हो सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कशिश मेथवानी के मिस इंटरनेशनल इंडिया 2023 से लेफ्टिनेंट बनने तक के सफर के बारे में।

Who is Kashish Methwani: कौन हैं कशिश मेथवानी?

🔹 लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी पुणे की रहने वाली हैं, जिन्होंने साल 2023 में मिस इंटरनेशनल इंडिया का खिताब जीता था। कशिश मेथवानी ने अपनी पढ़ाई में भी कमाल किया। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से MSc की और बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से न्यूरोसाइंस पर रिसर्च किया।

🔹 कशिश का थीसिस गामा ब्रेन वेव्स पर आधारित था। इसी रिसर्च के दम पर उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से PhD का ऑफर मिला। लेकिन विदेश जाने के बजाय उन्होंने देश की सेवा को चुना और CDS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) चेन्नई जॉइन किया।

🔹 कशिश मेथवानी ऐसे परिवार से आती हैं, जहां पहले कभी कोई सेना में नहीं गया। उनके पिता डॉ. गुरमुख दास, रक्षा मंत्रालय के DGQA में डायरेक्टर रह चुके हैं और मां शोभा मेथवानी आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपड़ी में शिक्षिका हैं।

🔹 कशिश मेथवानी की बहन शगुफ्ता इंजीनियर हैं। परिवार में पढ़ाई-लिखाई का माहौल जरूर था, लेकिन आर्मी का कोई बैकग्राउंड नहीं था। ऐसे में कशिश का यह चुनाव वाकई साहसिक था।

Success Story Kashish Methwani

मल्टी-टैलेंटेड कशिश: पिस्टल शूटिंग से भरतनाट्यम तक

कशिश बचपन से ही कहती थीं-"मुझे सबकुछ करना है।" यही वजह रही कि उन्होंने हर क्षेत्र में खुद को आजमाया। वे नेशनल लेवल पिस्टल शूटर हैं, बास्केटबॉल प्लेयर हैं, तबला बजाती हैं और भरतनाट्यम नृत्य में भी पारंगत हैं। इतना ही नहीं, वे एक NGO "क्रिटिकल कॉज" की संस्थापक भी हैं, जो प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेशन के बारे में जागरूकता फैलाता है।

ब्यूटी पेजेंट से CDS एग्जाम तक

कशिश की जिंदगी का दिलचस्प मोड़ यह है कि जब वे मिस इंडिया पेजेंट की तैयारी कर रही थीं, उसी समय CDS परीक्षा भी दे रही थीं। नतीजा यह हुआ कि जहां एक ओर उन्होंने ब्यूटी क्वीन का ताज जीता, वहीं दूसरी ओर आर्मी ऑफिसर बनने का सपना भी साकार किया।

OTA में भी उन्होंने खुद को हर स्तर पर साबित किया। यहां उन्हें डिबेट, स्पोर्ट्स और शूटिंग प्रतियोगिताओं में मेडल मिले। उन्होंने AAD मेडल, सिख ली रेजिमेंट मेडल और शूटिंग में सर्वाधिक अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। सबसे बड़ी बात, उनकी पूरी ट्रेनिंग के दौरान एक भी सजा नहीं मिली, जो बेहद दुर्लभ है।

Success Story Kashish Methwani

कशिश ने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षा की तैयारी की और इसमें ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल की। इस सफलता के बाद उन्होंने चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में अपनी ट्रेनिंग शुरू की। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन हुई हैं। उन्होंने आर्मी एयर डिफेंस (AAD) विंग को चुना है, जो एक लड़ाकू इकाई है और इसके लिए असाधारण साहस और कौशल की जरूरत होती है।

NCC से बदला सपना, पीएम मोदी से मिली बेस्ट कैडेट ट्रॉफी

कशिश की जिंदगी में असली मोड़ आया NCC से। 2021 में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों "ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट ट्रॉफी" मिली। इसके बाद उन्होंने गंभीरता से आर्मी में जाने का फैसला किया। वे बताती हैं कि NCC ने उन्हें अनुशासन, नेतृत्व और समय प्रबंधन सिखाया।

चुनौतियों से कभी नहीं डरीं कशिश

कशिश मानती हैं कि उनके जीवन में सबकुछ आसान नहीं था। वे भी आत्म-संदेह, बॉडी इमेज इश्यूज, फेल्योर और इम्पॉस्टर सिंड्रोम से जूझी हैं। लेकिन हर बार एक "कैटापल्ट" की तरह वापसी की। खुद वे कहती हैं-"हम अपने दिमाग में चल रही नकारात्मक आवाज़ नहीं हैं। हम उससे कहीं ज्यादा सक्षम हैं।"

कशिश मेथवानी की जर्नी उन लड़कियों और युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है जो सपने देखने के साथ-साथ उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। कशिश मेथवानी की कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अपने करियर को लेकर भ्रम में हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ सफलता हासिल की जा सकती है, बशर्ते आपके पास मजबूत इच्छाशक्ति और अनुशासन हो।

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