जीएसटी पर स्वामी ने खड़े किए सवाल, लिखा पीएम को पत्र

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स बिल के तहत यूपीए सरकार के उस फैसले की समीक्षा करने की अपील की है जिसमें डाटा मैनेडमेंट और जीएसटी में हिस्सेदारी का हिसाब किताब एक निजी कंपनी को सौंपने की बात कही गई है। बता दें कि यूपीए सरकार ने इस बिल में टैक्स कलेक्शन पर नियंत्रण रखने के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स बिल नेटवर्क (जीएसटीएन) बनाया था। स्वामी ने इसका जिक्र भी पीएम को लिखे पत्र मे किया है।

पत्र में किया सवाल

स्वामी ने पीएम को लिखे पत्र में सवाल खड़ा किया है कि कैसे किसी प्राइवेट संस्था को ' संवेदनशील' जानकारी बिना सिक्योरिटी क्लियरेंस के दी जा सकती है? जीएसटीएन कंपनी के मालिकाना हक की जानकारी देते हुए स्वामी ने लिखा है कि इस कंपनी में राज्य और केंद्र सरकार के कुल 49 फीसदी शेयर ही हैं और बाकी के शेयर प्राइवेट फर्म एचडीएफसी बैंक,आईसीआईसीआई बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पास है। इन कंपनियों की विदेश में भी हिस्सेदारी है।

स्वामी ने आरोप लगाते हुए पूछा है कि जो कंपनी सेक्शन 25 के तहत एक गैर लाभकारी संस्था है उसमें किस आधार पर 4,000 करोड़ रुपए का खर्च और इनके प्राथमिक खर्चों की फीस में विनियोजित किए गए है और क्यों प्राइवेट लाभ कमाने वाली संस्थाओं को इसमें शेयर दिए गए हैं?

स्वामी ने लिखा है कि इन सबमें ज्यादा महत्वपूर्ण रोल टैक्स कलेक्शन होगा जो डाटा कलेक्शन करेगा। इस स्थिति में वो सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारें हो सकती हैं। स्वामी ने लिखा है कि वास्तव में यह कभी गृह मंत्रालय के समक्ष सिक्योरिटी क्लियरेंस के लिए नहीं रखा गया जो चौकाने वाला है। उन्होंने लिखा है कि अभी भी वक्त है कि सरकार की मालिकाना हक वाली संस्था इसकी जगह लाई जाए।

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