कैसे हुई जीएसटी पर डील, कांग्रेस को किनारे कर किया समझौता

नई दिल्ली। पिछले हफ्ते ही राज्यसभा में जीएसटी संविधान संशोधन बिल पारित हो चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को इसके लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े हैं। उन्हें दो साल का लंबा समय जरूर लगा, लेकिन उन्होंने इस समय में यह सीख लिया कि इस मामले से कैसे निपटा जाए। पीएम मोदी को यह समझ आ चुका था कि जीएसटी को पारित कराने के लिए सिर्फ उनका और उनकी पार्टी का समर्थन काफी नहीं है।

MODI

न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक भाजपा सरकार के कुछ सूत्रों ने उन्हें बताया है कि इसके लिए पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक नया तरीका निकाला। सबसे पहले तो उन्होंने देश के 29 राज्यों की सरकारों को एक साथ किया, ताकि कांग्रेस को किनारे किया जा सके। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में हारने के बाद भी 2014 में जीएसटी बिल को पारित कराने की भाजपा की कोशिश राज्यसभा में नाकाम कर दी थी।

कांग्रेस नेताओं संग जेटली ने की मीटिंग

वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक करीबी सूत्र के अनुसार जेटली ने कांग्रेस के उन नेताओं के साथ बैठक की, जो जीएसटी का विरोध कर रहे थे। इस बैठक में उन्होंने उनकी मांगों को सुना। पी चिदंबरम समेत बनी कांग्रेस की एक टीम के एक सदस्य के मुताबिक जेटली ने कई मांगों को स्वीकार किया और जीएसटी बिल पारित कराने के लिए उनसे जिस संशोधन की मांग की जा रही थी, उस पर भी विचार किया गया।

ऐसे हुआ नेगोशिएशन मुमकिन

काग्रेस के वरिष्ठ अधिकारी जयराम रमेश ने कहा कि नेगोशिएशन (बातचीत कर समझौता) तभी हो सकता है जब दोनों तरफ के लोग ऐसा चाहें, जबकि दोनों तरफ के लोग अपनी बात पर अड़े हुए थे। जेटली के एक सहयोगी ने कहा कि कांग्रेस के लगातार बढ़ते अलगाव (आइसोलेशन) ने समझौते को मुमकिन बना दिया।

कांग्रेस के पास थे दो विकल्प

नाम गुप्त रखे जाने की शर्त पर वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस ने खुद को किनारे किया है। उनके पास दो विकल्प थे- या तो वे एक समझौता करके अपनी छवि सुधार लें या फिर हारकर अपनी छवि बिगाड़ लें। पिछले हफ्ते राज्य सभा में 122वें संविधान संशोधन बिल को अधिकतर लोगों का समर्थन मिलने के साथ ही जीएसटी का पहिया तेजी से घूमने लगा।

चिदंबरम के जीएसटी का किया था विरोध

यह वही जीएसटी था, जिसका प्रस्ताव पी चिदंबरम ने करीब एक दशक पहले रखा था, लेकिन राजनीति विरोध के चलते उसे पारित नहीं कराया जा सका। जीएसटी के लिए दिए गए वोट दिखाते हैं कि कैसे भारत में पूरे देश के लिए एक टैक्स लागू किया जा सकता है, जो केन्द्र और राज्य को एक प्लेटफॉर्म पर ले आएगा। आपको बता दें कि अमेरिका और यूरोपियन यूनियन भी अभी तक अपने यहां जीएसटी लागू नहीं कर पाए हैं।

सुधर गया है बातचीत का माहौल

भले ही अभी जीएसटी की दर का निर्धारण करना बाकी है, लेकिन अच्छी बात यह है कि दोनों पार्टियों में बातचीत का वातावरण काफी सुधर गया है। जेटली ने चिदंबरम से दोस्ती भरे तरीके से बात की। इससे पहले कांग्रेस ने राज्यसभा में भाजपा की तरफ से जीएसटी पारित कराने की कोशिश नाकाम कर दी थी और पीएम मोदी के भूमि अधिग्रहण बिल को भी किसानों के खिलाफ बताते हुए पारित नहीं होने दिया था।

राज्यों से किया वादा रहा मददगार

जेटली ने राज्यों को वादा किया है कि वह जीएसटी बिल लागू हो जाने के बाद 5 साल तक राज्यों के नुकसान की भरपाई करेंगे। पश्चिम बंगाल के वित्ति मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि इस वादे के चलते ही 26 जुलाई को नई दिल्ली में जीएसटी पर बातचीत हुई थी। इसके बाद 27 जुलाई को कांग्रेस ने जीएसटी को लेकर केन्द्र और राज्यों के बीच के विवाद पर एक नया प्रस्ताव दिया, जिसे उसी शाम को पीएम मोदी की कैबिनेट ने स्वीकार भी कर लिया।

राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ जीएसटी

इसके बाद जब यह जीएसटी संविधान संशोधन बिल 3 अगस्त को राज्यसभा में आया तो वहां पर जीएसटी के पक्ष में 203 वोट पड़े जबकि किसी ने भी इसके विरोध में वोट नहीं डाला। हालांकि, एआईएडीएमके के सांसद जीएसटी का विरोध करते हुए संसद से बाहर चले गए थे।

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