क्या बीजेपी के 'स्वामी' हो जाएंगे TMC के? जानिए ममता बनर्जी और सुब्रमण्यम स्वामी की मुलाकात के मायने

नई दिल्ली, 24 नवंबर। पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद अब पार्टी के विस्तार पर ध्यान दे रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों दिल्ली के दौरे पर हैं। मंगलवार को उनके दौरे का पहला दिन था और पहले ही दिन में उन्होंने कांग्रेस के 2 और जेडीयू के एक बड़े नेता को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। इस हिसाब से माना जा रहा है कि ममता बनर्जी इस बार दिल्ली दौरे पर कुछ तूफानी ही करके जाने वाली हैं। कल ममता ने कांग्रेस के पूर्व सांसद अशोक तंवर और कीर्ति आजाद को अपनी पार्टी में शामिल किया तो वहीं जेडीयू के पूर्व सांसद पवन वर्मा भी कल टीएमसी में शामिल हो गए। इस बीच बुधवार को ममता बनर्जी बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से मिलने वाली हैं। ये मुलाकात पीएम मोदी से होने वाली मुलाकात से पहले होने की संभावना है।

क्या भाजपा के 'स्वामी' हो जाएंगे टीएमसी के?

क्या भाजपा के 'स्वामी' हो जाएंगे टीएमसी के?

विचारधारा के मामले में एक-दूसरे के धुर विरोधी इन नेताओं की मुलाकात को लेकर देश की सियासत में हलचल पैदा हो गई है। अटकलें यही लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस और जेडीयू को जोर का झटका देने के बाद क्या ममता बनर्जी अब बीजेपी को भी एक झटका देने की तैयारी में हैं? क्या सुब्रमण्यम स्वामी बीजेपी छोड़ टीएमसी में जाने वाले हैं? ये सवाल इसीलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि सुब्रमण्यम स्वामी भाजपा के अंदर एक बागी नेता के तौर पर देखे जाते हैं। वो समय-समय पर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं।

पीएम मोदी के आलोचक हैं सुब्रमण्यम स्वामी

पीएम मोदी के आलोचक हैं सुब्रमण्यम स्वामी

- आपको बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी के टीएमसी में जाने की कई वजह हो सकती हैं। स्वामी लंबे समय से बीजेपी में हैं, लेकिन उनका कद पार्टी के अंदर अभी तक नहीं बढ़ा है। अर्थशास्त्र के ज्ञाता सुब्रमण्यम स्वामी को कई बार केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की अटकलें सामने आईं, लेकिन एकबार भी वो सही साबित नहीं हुई। साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के कई बड़े नेताओं की समय-समय पर आलोचना करते रहते हैं।

- हाल ही में उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि केंद्र की सरकार में लोकतांत्रिक चेतना की कमी है। स्वामी ने इजराइल और म्यांमार के मुद्दे पर भारत सरकार के कदम की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार ने चीन समर्थक बर्मी सेना द्वारा म्यांमार में लोकतंत्र की हत्या की निंदा और आंग सान सूकी की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र के वोट में भाग नहीं लिया। हमने इजरायल पर और अब म्यांमार के मुद्दे पर अपने आप को अलग रखा है। क्या हमने अपनी विवेक शक्ति खो दी है? सुब्रमण्यम स्वामी कई बार आर्थिक मामलों पर भी मोदी सरकार को घेर चुके हैं।

ममता बनर्जी के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनाया था सॉफ्ट रूख

ममता बनर्जी के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनाया था सॉफ्ट रूख

पीएम मोदी की आलोचना करने के अलावा सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में ममता बनर्जी का पक्ष भी लिया था। दरअसल, केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी को इटली जाने की अनुमति नहीं दी थी। ममता बनर्जी रोम में एक धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए जा रही थीं, लेकिन विदेश मंत्रालय ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसको लेकर भी स्वामी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और ममता बनर्जी का पक्ष लिया था। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी क्यों रोम जाने से रोका गया है ?

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    3 महीने में 5 बड़े नेताओं को कराया टीएमसी में शामिल

    3 महीने में 5 बड़े नेताओं को कराया टीएमसी में शामिल

    आपको बता दें कि ममता बनर्जी दिल्ली आकर भाजपा विरोधी नेताओं को एकजुट करने में लगी हैं और हो सकता है सुब्रमण्यम स्वामी इस लिस्ट में अगला नाम हों। बंगाल में बीजेपी को धूल चटाने के बाद ममता अपनी पार्टी को और आगे बढ़ाना चाहती हैं और इसी कोशिश में उन्होंने पिछले 3 महीने के अंदर 5 बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराया है। इनमें गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फलेरियो, असम के सिलचर से कांग्रेस की सांसद रह चुकीं सुष्मिता देव, उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरा बने ललितेश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके अलावा त्रिपुरा में भाजपा विधायक आशीष दास ने टीएमसी ज्वॉइन की।

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