मोदी सरकार की खरी-खोटी सुनकर निराश लौटे कैरी

john kerry
नयी दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी बड़े उत्साह के साथ भारत आए थे। उन्हें उम्मीद थी कि भारत दौरे के दौरान उनकी वार्ता भारत-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक दिशा लाएंगी। अमेरिका को उममीद थी की जॉन कैरी की भारत यात्रा सकारात्मक पहलुओं के साथ पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा का माहौल बनाने वाला होगा, लेकिन उनकी उम्मीद पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार ने पानी फेर दिया।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी के लिए भारत दौरा बहुत उत्साह भरा नहीं रहा। जॉन केरी को भारतीय नेताओं की जासूसी पर दो टूक शब्दों में विरोध और अप्रवासी भारतीयों से संबंधित विधेयक पर कड़े रूख का सामना करना पड़ा। भारत सरकार ने अमेरिका की उम्मीदों पर खड़े होने के बजाय वार्ता में अपनी प्राथमिकताओं पर ज्यादा जोर दिया।

इनमें सबसे अहम रहा भारतीय नेताओं की जासूसी, अप्रवासी भारतीयों से संबंधित विधेयक के अलावा आर्थिक सुधारों पर भी भारत ने अपनी स्वतंत्र राय रखी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेताओं के जासूसी मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर नेताओं की जासूसी बर्दास्त नहीं की जाएगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री केरी और उनके साथ आए कॉमर्स सेक्रटरी पेनी प्रिट्जकर भारत सरकार को यह समझाने में विफल रहे कि डब्ल्यूटीओ डील के खिलाफ अपना विरोध खत्म करें। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी एजेंसियों द्वारा भारतीय नेताओं की जासूसी, अप्रवासी भारतीयों से संबंधित विधेयक पर सरकारी विरोध के अलावा बीजेपी ने भी स्नूपिंग मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध जता दिया है। पिछली यूपीए सरकार के से उलट मोदी सरकार ने इन मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। गौरतलब है कि मनमोहन नीत यूपीए-2 सरकार ने स्नूपिंग मसले पर अमेरिका के सामने कड़ा विरोध नहीं जताया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+