Farmers Protest: पंजाब में कोरोना की नई पाबंदियों के बाद किसान आंदोलन का क्या होगा?
Farmers Protest चंडीगढ़: पूरी दुनिया की तुलना में भारत में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। अब तक 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है, लेकिन देश के कई राज्यों में फिर से हालात बिगड़ना शुरू हो गए हैं। महाराष्ट्र के बाद अब मध्य प्रदेश और पंजाब में भी कोरोना केसों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में कोरोना के नए मामलों को लेकर पंजाब सरकार गंभीर है, लेकिन यहां जारी किसानों के आंदोलन का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं हुआ है। क्योंकि राज्य सरकार ने मंगलवार को इनडोर और आउटडोर समारोहों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। डिप्टी कमिश्नरों को 1 मार्च से रात में कर्फ्यू लगाने के आदेश दिए हैं।

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पिछले साल सितंबर में लागू किए गए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने के लिए हजारों किसान, जो ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं लगभग तीन महीने से दिल्ली की बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। इसके अलावा पंजाब में भी किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर इस तरह की सरकार की ओर से सख्तियां लागू की गई है तो फिर किसान आंदोलन को लेकर अब क्या रणनीति अपनाई जाएगी।
वहीं पंजाब की मुख्य विपक्षी पार्टी AAP ने पहले कहा था कि वह किसानों के आंदोलन के समर्थन में 21 मार्च को मोगा जिले में "किसान महासम्मेलन" का आयोजन करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर नए आदेश जारी किए, जिसके तहत इंडोर कार्यक्रम में सिर्फ 100 लोगों के इकट्ठा होने की इजाजत रहेगी। इसके अलावा आउटडोर प्रोग्राम में 200 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। हालांकि ये पाबंदियां 1 मार्च से लागू होंगी। वहीं मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश प्रशासन को दिए गए हैं। मौजूदा वक्त में पंजाब में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1,78,847 है, जिसमें 5,769 की मौत हुई है, जबकि 1,69,911 लोग ठीक हो चुके हैं।












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