तीन हत्या के बाद एक कट्टर मुसलमान को ऐसा पश्चाताप हुआ कि बन गया था हिंदू

नई दिल्ली, 10 जून। किसी भी आस्तिक व्यक्ति के लिए धर्म आस्था का विषय है। वह धर्म के बारे में क्या सोचता है, फिर कैसे उसकी सोच बदल जाती है, यह मन की अवस्था पर निर्भर है। एक कट्टर मुस्लिम व्यक्ति ने भारत विभाजन के समय तीन सिखों की हत्या की थी। उनकी सम्पत्तियों को आग के हवाले किया था। लेकिन एक वक्त ऐसा आया कि उसका मुस्लिम धर्म से मोहभंग हो गया।

story of Mohammad Anwar Sheikh became a Hindu after three murders

वह मुस्लमान से हिंदू बन गया। वह कोई सामान्य सोच वाला इंसान नहीं था। उसकी जिंदगी में नया मोड़ आया। वह इंग्लैंड में बस गया। फिर वह मशहूर लेखक बना जिसने कई किताबें लिखीं। मोहम्मद अनवर शेख कैसे अनिरुद्ध ज्ञान शिखा बन गया, इसकी बहुत मार्मिक कहानी है। अनवर ने अपनी गलतियों के बारे में खुल कर लिखा है। उसने सिख पिता पुत्र की हत्या के बारे में भी खुल कर लिखा है। फिर कैसे उसका हृदय परिवर्तन हुआ, यह जानना भी जरूरी है।

मोहम्मद अनवर शेख

मोहम्मद अनवर शेख

मोहम्मद अनवर शेख का जन्म 1928 में उत्तरी पंजाब (पाकिस्तान) में हुआ था। वह पढ़ने में जहीन था। 19 साल की उमर में उसे रेलवे में नौकरी मिल गयी। वह लाहैर में एकाउंट्स क्लर्क था। अगस्त 1947 का पहला हफ्ता चल रहा था। अभी भारत- पाकिस्तान की आजादी की घोषणा नहीं हुई थी। मुल्क में दंगे फसाद चल रहे थे। जैसा कि अनवर शेख ने लिखा है, उसके मुताबिक घटनक्रम कुछ यूं रहा। उसने लाहौर रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन देखी जिसमें कई लाशें पड़ी हुईं थीं। ये ट्रेन पूर्वी पंजाब से आयी थी। मुस्लिम लोगों की लाशें देख कर अनवर शेख आक्रोशित हो गया। उसने बदला लेने की ठान ली। बाजार गया और एक लंबा चाकू खरीदा। फिर अनवर चाकू लेकर गैरमुस्लिमों को खोजने लगा। उन दिनों कर्फ्यू लगे रहते थे और हर आदमी एक दूसरे से डरता था। एक दिन अनवर मौका देख कर गैरमुस्लिमों की तलाश में निकला था। उसने देखा कि एक सिख अपने पुत्र के साथ आ रहा है। अनवर ने बेरहमी से दोनों की हत्या कर दी। फिर वह इस गिरोह में शामिल हो गया जो गैरमुस्लिमों के खिलाफ हिंसा के लिए मौका खोज रहे थे। अगले दिन एक और गैरमुस्लिम को मारा। कई लोगों के घरों में आग लगायी। इस घटना के अगले दिन वह अपने दफ्तर नहीं गया। तब वह गुस्से में था। इसलिए उसे अपने किये पर पछतावा नहीं था।

अनवर से बने अनिरुद्ध

अनवर से बने अनिरुद्ध

लेकिन कुछ दिन गुजरने के बाद जब उसका गुस्सा ठंडा पड़ा तो उसके सोचने का तरीका बदलने लगा। बीती हुई बातें उसके जेहन में हमेशा तैरती रहतीं। उसे खून खराबे पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी। उसे अपने किये अफसोस होने लगा कि आखिर उसने तीन बेकसूर लोगों की हत्या क्यों कर दी। एक छोटे बच्चे को मारने की बात याद कर उसका मन बेचैन रहने लगा। अनवर ने लिखा है, मैं पश्चाताप के साथ कहता हूं कि वे दिन मेरी जिंदगी के अंधेरे दिन थे। मैं एक उदारवादी इंसान हूं जो इंसानियत में यकीन रखता है। मैं एक इंसान के वजूद और उसके गौरव में विश्वास रखता हूं। कोई आदमी अपना विश्वास किसी दूसरे पर थोपे, ये मुझे गवारा नहीं। ये सब बातें अनवर के दिमाग में चलती रहती थीं। जब वह 25 साल का हुआ तो अपने धार्मिक विश्वासों के लेकर असहज महसूस करने लगा। अनवर पाकिस्तान से इंग्लैंड गया। अनवर ने 2004 में दिये एक इंटरव्यू में कहा था, जब मैं रात को सोया तब मुस्लिम था। लेकिन जब सुबह जगा तो मन से मैं हिंदू बन चुका था। ये कैसे हुआ, मैं कह नहीं सकता। मैं तो शुरू में कट्टर हिंदू विरोधी था। लेकिन ऐसा हुआ। हो सकता है मेरे अंदर पूर्वजों का जीन अचानक सक्रिय हो गया हो। अनवर के पूर्वज कश्मीरी पंडित थे जिन्होंने बहुत पहले मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था। हिंदू बनने के बाद अनवर शेख ने अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रखा। फिर उसने ऋग्वेद का अध्ययन किया। वेद का ज्ञान अर्जित करने के बाद अनिरुद्ध ज्ञान शिखा ने अंग्रेजी में एक किताब लिखी- 'द वैदिक सिविलाइजेशन'।

ब्रिटेन के कार्डिफ शहर में बनाया था बसेरा

ब्रिटेन के कार्डिफ शहर में बनाया था बसेरा

अनिरुद्ध ज्ञान शिखा ब्रिटेन के कार्डिफ शहर में रहते थे। कार्डिफ वेल्स की राजधानी हैं। उन्होंने एक वेल्स महिला से शादी की थी। उन्होंने अपने बच्चों को किसी भी धर्म को मानने की आजादी थी। अनिरुद्ध ज्ञान एक लेखक होने के अलावा सफल व्यवस्यी भी थे। अनवर के अनिरुद्ध बनने पर पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। अनवर के मुस्लिम धर्म छोड़ने और उसकी आलोचना से नाराज पाकिस्तान के मौलवियों ने 1995 में उनके खिलाफ फतवा जारी कर मौत का फरमान जारी किया था। लेकिन वे अपने विचारों पर कायम रहे। 2006 में कार्डिफ शहर में ही उनका निधन हो गया था। ये कहानी बताती है कि धर्म कोई भी हो, वह हिंसा को न्यायोचित नहीं ठहरा सकता। धर्म सदैव प्रेम और सद्भाव का पाठ पढ़ाता है।

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