आखिरी पलों की कहानी: 30 गोलियां मारी गई थीं इंदिरा गांधी को, पूरी मैगजीन खाली कर दी थी सुरक्षा गार्ड ने
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नई दिल्ली। आज यानी 31 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास का बेहद ही अहम दिन है। 31 अक्टूबर को ही इंदिरा गांधी की हत्या की गई थी। वह सुबह भारत के इतिहास में सबसे बुरी सुबह थी, जिसने इंदिरा गांधी की सांसें छीन लीं। इंदिरा गांधी को उनके ही सुरक्षा गार्ड ने गोलियों से छलनी कर दिया था। उन्हें 30 गोलियां मारी गई थीं।

चढ़ाया गया था 88 बोतल खून
गोलियों से उनका लिवर और फेफड़े बुरी तरह से छलनी हो गए थे। रीढ़ की हड्डी में भी कई गोलियां धंसी हुई थीं। उनके शरीर में सिर्फ उनका दिल ही सही सलामत बचा था। उनके बचने की उम्मीद काफी कम थी, लेकिन उसके बावजूद 12 डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने की नाकाम कोशिश करती रही। उन्हें O निगेटिव खून की 88 बोतलें चढ़ाई गई थीं। इन सभी के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। जानिए 30 अक्टूबर की शाम से 31 अक्टूबर तक कैसे चला घटनाक्रम।

कहने के बावजूद नहीं रद्द किया था 31 अक्टूबर का कार्यक्रम
उड़ीसा में चुनाव प्रचार करने के बाद वह 30 अक्टूबर की शाम दिल्ली पहुंची थीं। यूं तो वह जब दिल्ली में रहती थीं तो उनके घर एक सफदरगंज रोड पर जनता दरबार लगता था, लेकिन अगर वह किसी दिन दिल्ली देर से लौटती थीं तो अगले दिन एक सफदरगंज रोड पर जनता दरबार नहीं लगता था, लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ। 30 अक्टूबर की शाम को इंदिरा गांधी से यह कहा भी गया कि वह अगले दिन का कार्यक्रम रद्द कर दें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

आइरिस डायरेक्टर पीटर के उस्तीनोव के साथ था इंटरव्यू
अगले दिन का कार्यक्रम उन्होंने इसलिए रद्द नहीं किया था, क्योंकि अगले दिन उन्होंने आइरिश फिल्म डायरेक्टर पीटर उस्तीनोव को मुलाकात का वक्त दे चुकी थीं। अगले दिन वह रोज की तरह उठीं और तैयार होने लगीं। इंदिरा गांधी पर डॉक्युमेंट्री बना रहे पीटर उस्तीनोव वहां पहुंच चुके थे। सुबह करीब 9 बजे वह एक अकबर रोड की तरफ चल पड़ीं।

रास्ते में वेटर से मिलीं इंदिरा, अच्छा टी-सेट लाने को कहा
इंटरव्यू के लिए पीटर उस्तीनोव के पास जाते समय रास्ते में ही उन्हें वेतर मिला, जिसके हाथ में एक कप और प्लेट था। इंदिरा गांधी ने पूछा कि ये कप-प्लेट लेकर वो कहां जा रही है। उसने बताया कि इंटरव्यू के दौरान पीटर एक टी-सेट टेबल पर रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कोई अच्छा सा टी-सेट लेकर आए।

सुरक्षा में मौजूद थे हत्यारे
जल्दी-जल्दी चलते हुए वह उस गेट से करीब 11 फुट दूर पहुंच गई थीं, जो एक सफदरगंज रोड को एक अकबर रोड से जोड़ता है। वहां गेट पर सब इंस्पेक्टर बेअंत सिंह तैनात था। वहीं पास में संतरी बूथ में कॉन्स्टेबल सतवंत सिंह स्टेनगन लिए खड़ा था।

खुद इंदिरा ने कहा नमस्ते, फिर उन्हें मारी गई गोली
जैसे ही इंदिरा गांधी उस बूथ के पास पहुंची तो बेअंत सिंह और जसवंत सिंह को उन्होंने खुद ही हाथ जोड़कर नमस्ते कहा। तभी अचानक बेअंत सिंह ने अपनी 0.38 बोर की सरकारी रिवॉल्वर निकाली और इंदिरा गांधी पर एक के बाद एक तीन गोलियां दाग दीं। उनके मुंह से सिर्फ इतना निकल सका कि ये क्या कर रहे हो।

सतवंत सिंह ने इंदिरा पर खाली कर दी पूरी मैगजीन
तीन गोलियां लगने के बाद जैसे ही वह जमीन पर गिरीं, वैसे ही सतवंत सिंह ने अपनी स्टेनगन निकाली और एक के बाद एक उन पर गोलियों की बौछार कर दी। एक मिनट तक सतवंत सिंह ने लगातार गोलियां चलाईं। वह तब तक गोलियां चलाता रहा, जब तक कि पूरी मैगजीन खाली नहीं हुईं। तीस गोलियों से इंदिरा गांधी का शरीर छलनी हो चुका था, जिसके बाद एम्स अस्पताल में उनकी मौत हो गई।












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