लव जिहाद के नाम पर किए जा रहे हैं ये 5 काम

यूपी व गुजरात में हालिया चुनाव परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में ना आए हों पर समुदाय विशेष पर अंकुश लगाने की राजनीति कोने-कोने में कदम बढ़ाती दिख रही है। पहले एक भाजपा नेत्री ने मुस्ल‍िमों को गरबा नृत्य में आने से रोका व अब विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया भी इसी तरह के बयान पर अड़ गए हैं।

दलील दी जा रही है कि ऐसे समारोहों में हिस्सा लेने वाले हर व्यक्ति और आगंतुकों का पहचान पत्र जांचा जाना चाहिए। इस तरह के नियम-कायदे साबित करते हैं कि एक 'डर' किस तरीके से फरमानों का रूप लेता जा रहा है व हाईकमान इस पर चुप्पी साधे हुए है।

घुमाएं स्लाइडर और जानें कि किस तरह की तैया‍रियों से समाज में नकारात्मक छवि का संचार हो रहा है। राजनीति भले ही अपनी दिशा में मग्न दिख रही हो पर पीछे के दरवाजे से आगामी विधानसभा चुनवों को साधने की भरपूर कोश‍िशें जारी हैं-

क्या है गरबा...

क्या है गरबा...

गरबा गुजरात, राजस्थान और मालवा प्रदेशों में प्रचलित एक लोकनृत्य है जो मूल रूप से गुजरात का माना जाता है।आजकल इसे आधुनिक नृत्यकला में स्थान मिल गया है... बॉलीवुड से लेकर आम जनजीवन में इसका क्रेज़ चरम पर है।

ऐसे रोकेंगे मुस्ल‍िमों को...

ऐसे रोकेंगे मुस्ल‍िमों को...

खबरों की मानें तो दरअसल 1500 वालंटियर की एक टीम बनाई गई है, जो मुस्लिम युवकों को 'गरबा फेस्टिवल' से दूर रखने की जिम्मेदारी संभालेगी। साथ ही प्राइवेट सुरक्षा गार्ड्स को भी चुस्ती से तैनात करने की योजना बन गई है।

अस्म‍िता हितरक्षक समिति ने कसी कमर

अस्म‍िता हितरक्षक समिति ने कसी कमर

एक और पेंच यह फसता दिख रहा है कि'हिंदू अस्मिता हितरक्षक समिति' अब तक खुद को रजिटर्ड भी नहीं करा पाया है, लेकिन वीएचपी के नेता आशीष भट्ट का कहना है कि इसे विश्व हिंदू परिषद का समर्थन हासिल है। इस प्रकार 25 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र फेस्टिवल के दौरान गुजरात और मध्य प्रदेश में नई मुहिम छेड़ने की योजना है।

वंदे मातरम नहीं गाते तो यहां क्यों आएं

वंदे मातरम नहीं गाते तो यहां क्यों आएं

यह दलील भी सुनने में आई है कि 'वंदे मातरम न गाने वालों को क्यों करें गरबा में शामिल'। मुस्लिम युवकों को केवल तब ही समारोह में शामिल होने की इजाजत दी जाएगी, यदि वो परिवार के साथ आते हैं।

लव जिहाद को गरबा से जोड़ना गलत

लव जिहाद को गरबा से जोड़ना गलत

सामाजिक तौर पर लव जिहाद जैसी शब्दावली को पवित्र उत्सवों से जोड़ना गलत है पर कहा जा रहा है कि "लव जिहाद से निपटने के लिए हम किसी भी मुस्लिम युवक को उत्सव स्थल में प्रवेश नहीं करने देंगे। क्या अाप इसे ठीक मानते हैं?

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