CBI की 'नो एंट्री' पर बोले जेटली- डरते वो हैं जिनके पास छुपाने को बहुत कुछ है
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सीबीआइ को किसी भी तरह से जांच रोके जाने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दोनों राज्य सरकारों पर पलटवार किया है। अरुण जेटली ने कहा कि केवल वही लोग सीबीआई को रोकना चाहते हैं जिनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ है। जेटली ने आगे कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी राज्य की कोई संप्रभुता नहीं है। आंध्र प्रदेश सरकार का यह कदम किसी भी विशेष मामले से प्रेरित नहीं है बल्कि कुछ होने की आशंका को देखते हुए ऐसा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि शारदा और नारदा घोटालों को इस तरह से दबाया नहीं जा सकता।

क्या है पूरा मामला?
बता दें कि शुक्रवार को आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने राज्य में सीबीआई के घुसने पर पांबदी लगा दी है। चंद्रबाबू नायडू सरकार ने सीबीआई को दी गई उस 'आम सहमति' को वापस ले लिया जिसके आधार पर सीबीआई राज्य सरकार को बिना कोई सूचना दिए राज्य में जाकर किसी भी मामले में कभी छानबीन या छापेमारी कर सकती थी। सरकार यह फैसला लेते हुए कहा कि सीबीआई के टॉप अधिकारियों पर लगे घूस के आरोपों के बाद से सीबीआई पर लोगों का भरोसा कम हुआ है इसलिए सरकार 'आम सहमति' को वापस ले रही है। आंध्र प्रदेश के इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी राज्य में बिना अनुमति सीबाआई के घूसने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
एफआईआर के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी
बताया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार की इस अधिसूचना का सबसे अधिक प्रभाव राज्य के भीतर मौजूद केंद्र सरकार के उपक्रमों व कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर पड़ेगा। क्योंकि केंद्रीय उपक्रम में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सीबीआई को है। लेकिन अब एफआईआर दर्ज करने से पहले राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी। लेकिन अगर हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है तो राज्य सरकार का ये प्रतिबंध लागू नहीं होगा और एंजेसी पहले की तरह ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
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