गांधी जयंती 2024: आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी! बापू के जन्मदिवस पर पढ़ें टॉप 10 रोमांचक कथन
Mahatma Gandhi Quotes: महात्मा गांधी के बारे में महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन ने कहा था, "आने वाली पीढ़ी के लिए यह विश्वास करना कठिन होगा कि हाड-मांस का बना ऐसा कोई आदमी इस धरती पर पैदा हुआ था।" कथन का मूल रूप इस प्रकार है, "Generations to come will scarce believe that such a one as this walked the earth in flesh and blood".
महात्मा गांधी के लिए विश्व के महानतम व्यक्तित्व ने अपने उद्गार व्यक्त किए हैं, जो आज एक उद्धरण के रूप में याद किए जाते हैं, लेकिन स्वयं गांधी जी के अनेक उद्धरण और कथन ऐसे हैं, जो एक व्यक्ति और समाज के रूप में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। यहां देखते हैं गांधी जी के कुछ प्रसिद्ध कथन जो मानवता, स्वतंत्रता और भारतीयता के अमूल्य धरोहर हैं।

महात्मा गांधी के 10 अमर कथन: जीवन और इतिहास की रोशनी
महात्मा गांधी का जीवन प्रेरणा का महास्रोत रहा है। उन्हें भारत का राष्ट्रपिता कहा जाता है, लेकिन उनके विचार और उद्धरण केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक बने हैं। गांधीजी का हर शब्द उनके जीवन के गहन अनुभवों का निचोड़ था। उनकी कही बातें आज भी प्रासंगिक हैं और हमें जीवन जीने की नई दिशा देती हैं। आइए जानते हैं महात्मा गांधी के 10 प्रमुख उद्धरण और उनके पीछे के संदर्भ, जो उनके जीवन और हमारे इतिहास के अहम मोड़ रहे।
'अहिंसा परमो धर्मः'
गांधीजी के लिए अहिंसा केवल एक सिद्धांत नहीं था, बल्कि उनके जीवन का मूलभूत आधार थी। मजेदार बात यह है कि आज-कल इस कथन के लिए गांधी जी पर निशाना भी साधा जाता है और कहा जाता है कि गांधी ने महाभारत के श्लोक को संदर्भ रहित कर इसका उपयोग अपने विचारों को मान्यता देने के लिए किया है। वैसे गांधी जी ने असहयोग आंदोलन के दौरान, गांधीजी ने अहिंसा को ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाया। गांधी जी न केवल अपनी सभाओं में सभाओं और आंदोलनों में यह कथन उद्धृत किया बल्कि अपने जीवन में भी इसका पालन करते रहे।
'सत्य ही ईश्वर है'
गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र सत्य था। वे हमेशा सत्य के साथ खड़े रहने पर जोर देते थे। गांधी जी ने यह वक्तव्य तब दिया था जब 1930 में डांडी मार्च के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़ा था। यह उनके सत्याग्रह का प्रतीक था।
'आप वह परिवर्त्तन बनें जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं'
गांधीजी आत्मपरिवर्तन के महत्व पर जोर देते थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत परिवर्तन से ही समाज में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। 1940 के दशक में स्वतंत्रता आंदोलन के चरम पर, गांधीजी ने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति को अपने अंदर सुधार लाने की आवश्यकता है। यह उद्धरण उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक भाषणों में व्यक्त किया।
'जो प्रेम से किया जाता है वह कभी व्यर्थ नहीं जाता'
गांधीजी ने हमेशा प्रेम और सहिष्णुता को समाज में स्थिरता और शांति का मूल माना। उनका यह कथन तब आया जब वे 1925 के सांप्रदायिक दंगों के समय जब हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम कर रहे थे। दोनों समुदायों के बीच साहचर्य स्थापित कर गांधी जी ने अंततः यह सिद्ध भी कर दिया कि प्रेम से किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता है।
'आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी'
यह कथन गांधीजी की अहिंसा नीति का प्रतिबिंब है। उन्होंने हिंसा का प्रतिशोध न लेने की नीति पर हमेशा जोर दिया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब दुनिया में हिंसा का दौर चल रहा था तब अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों और भारतीय सभाओं में यह बात कही थी।
'स्वतंत्रता का मूल्य कभी कम नहीं किया जा सकता'
गांधीजी के लिए स्वतंत्रता सर्वोपरि थी। उन्होंने इस उद्धरण के माध्यम से भारतीयों को अपनी स्वतंत्रता के लिए जागरूक किया। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में उन्होंने यह बात कही थी। उनके इस कथन से प्रेरित होकर अनेक लोगों ने स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
'धरती सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन किसी के लालच को नहीं'
यह उद्धरण प्रकृति और संसाधनों के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलने का आह्वान करता है। 1931 के लंदन में गोलमेज सम्मेलन के दौरान, जब वैश्विक नेताओं के बीच यह चर्चा हुई कि संसाधनों का सही उपयोग कैसे किया जाए। गांधी का यह कथन विश्वबंधुत्व की भावना का परिचायक है।
'कमजोर कभी माफ नहीं कर सकता। क्षमा करने के लिए साहस चाहिए'
गांधीजी के अनुसार क्षमा करना कमजोरों का काम नहीं, बल्कि यह साहसी लोगों का गुण है। 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद जब ब्रिटिश सरकार से माफी की अपील की गई तो दिल्ली में हुई एक सभा में उन्होंने यह बात कही।
'सत्य का मार्ग कठिन होता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की होती है'
सत्याग्रह के सिद्धांत के पीछे गांधीजी की यही सोच थी। 1924 में जेल से रिहा होने के बाद यह बात गुजरात के अहमदाबाद में उन्होंने अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कही थी। सत्य आजीवन महात्मा गांधी का सहचर बना रहा। अलोचना, प्रशंसा, लक्ष्य और परिणाम की चिंता किए बिना वे सदैव सत्य का दामन थामे रहे।
'यदि धैर्य का मूल्य समझना हो तो बुरा समय आपके लिए सबसे अच्छा शिक्षक है'
जीवन में कठिनाइयों को धैर्य और साहस के साथ पार करने का संदेश गांधीजी ने हमेशा दिया। 1930 के नमक सत्याग्रह के बाद, जब उन्हें ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था तो जेल से लिखे गए उनके पत्रों में यह भावना झलकती है।
महात्मा गांधी के ये उद्धरण सिर्फ उनके समय तक सीमित नहीं थे, बल्कि आज भी वे हमारे जीवन को सही दिशा देने वाले मंत्र हैं। गांधीजी के विचार हमें आत्मसुधार, सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनका हर कथन, हर शब्द हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने जीवन में किस तरह से बदलाव ला सकते हैं।












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