Space Travel: स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स का नहाना, सोना व खाना कैसा होता है? चौंका देगी अंतरिक्ष वाली Life
Astronauts Space Life Explainer: अंतरिक्ष यात्रा, सितारों की दुनिया का एक ऐसा अद्वितीय अद्भुत सफर का सपना, जिसे सदियों से इंसान देखता आ रहा है। बदलते वक्त ने इन सपनों को हकीकत का रंग दे डाला है। भारत से लेकर पूरे विश्व से कई यात्री(एस्ट्रोनॉट्स) अंतरिक्ष का सफर कर चुके हैं। 12 अप्रैल 1961 को, सोवियत संघ के यूरी गगारिन ने वॉस्टॉक 1 अंतरिक्ष यान में उड़ान भरकर इतिहास रचा।
वहीं, भारत ने भी अपने अंतरिक्ष अन्वेषण के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण कदम उठाए। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 19 अप्रैल 1975 को अपना पहला उपग्रह, आर्यभट्ट, लॉन्च किया। इसी तरह, यह कारवां जारी है।

आज, अंतरिक्ष यात्रा केवल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों तक ही सीमित नहीं है। निजी कंपनियां जैसे स्पेसएक्स, ब्लू ओरिजिन और वर्जिन गैलेक्टिक अंतरिक्ष पर्यटन को एक नया आयाम देने के लिए प्रयासरत हैं। इन कंपनियों का उद्देश्य आम लोगों को अंतरिक्ष की यात्रा का अनुभव कराना है। यह हमारे सपनों को और अधिक वास्तविक और सुलभ बना रहा है। ऐसे में वनइंडिया आपको एस्ट्रोनॉट्स की अंतरिक्ष वाली संघर्ष से भरी लाइफ स्टाइल से रूबरू करा रहा है। आइए जानते हैं कि कैसे स्पेस में रहने वालों की धरती के इंसानों से अलग है जिंदगी?
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जैसे माइक्रोग्रैविटी वाले वातावरण में नहाना, सोना, शौच करना और खाना खाना पृथ्वी से बहुत अलग होता है। इन गतिविधियों को अंतरिक्ष में करने के लिए विशेष उपाय और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

स्पेस स्टेशन में कैसे नहाते हैं ?
ISS पर नहाने के लिए पारंपरिक बाथरूम नहीं होते, क्योंकि पानी और साबुन माइक्रोग्रैविटी में तैरने लगते हैं। अंतरिक्ष यात्री अपने शरीर को साफ रखने के लिए कुछ तरीकोंं का इस्तेमाल करते हैं...
- वाइप्स का उपयोग: अंतरिक्ष यात्री साफ करने के लिए गीले वाइप्स का उपयोग करते हैं।
- नो-रिन्स शैम्पू: बाल धोने के लिए नो-रिन्स शैम्पू का उपयोग किया जाता है, जिसे बालों में मलने के बाद तौलिये से पोंछा जाता है।
- फोम साबुन: फोम साबुन का उपयोग शरीर की सफाई के लिए किया जाता है, जिसे बिना पानी के साफ किया जा सकता है।

स्पेस स्टेशन में कैसे सोते हैं ?
- स्लीपिंग बैग्स: अंतरिक्ष यात्री स्लीपिंग बैग्स में सोते हैं, जो स्टेशन की दीवार से बंधे होते हैं।
- स्लीपिंग क्वार्टर: प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री का एक निजी स्लीपिंग क्वार्टर होता है, जिसमें स्लीपिंग बैग, वेंटिलेशन सिस्टम और व्यक्तिगत आइटम रखने की जगह होती है।
- आई मास्क और इयर प्लग्स: अंतरिक्ष यात्री नींद के लिए आई मास्क और इयर प्लग्स का उपयोग करते हैं, क्योंकि स्टेशन में दिन-रात का कोई स्पष्ट अंतर नहीं होता और शोर भी हो सकता है।

शौच करने का अलग है तरीका
- शौचालय: अंतरिक्ष यात्री शौचालय में बैठते समय खुद को बंधे रखते हैं, ताकि वे माइक्रोग्रैविटी में हवा में तैरने न लगे। शौचालय में वैक्यूम सिस्टम होता है, जो अपशिष्ट पदार्थों को तुरंत खींच लेता है।
- लिक्विड वेस्ट: पेशाब के लिए भी वैक्यूम सिस्टम का उपयोग होता है, जो लिक्विड वेस्ट को एकत्रित करता है और उसे फिल्टर करने के बाद दोबारा उपयोगी पानी में परिवर्तित करता है।
- सॉलिड वेस्ट: सॉलिड वेस्ट को संग्रहित किया जाता है और समय-समय पर पृथ्वी पर वापस लाया जाता है या जला दिया जाता है।

किस तरह का खाना और कैसे खाते हैं?
- प्री-पैकेज्ड मील्स: खाना पहले से पैकेज्ड होता है और इसे दोबारा हाइड्रेट करने की आवश्यकता होती है। खाने को माइक्रोवेव जैसे हीटर में गरम किया जाता है।
- पानी: पानी पाउच में होते हैं और उसे स्ट्रॉ से पिया जाता है। क्योंकि माइक्रोग्रैविटी में पानी तैरने लगता है।
- स्पेशल टूल्स: खाने के लिए विशेष कटलरी और टूल्स का उपयोग किया जाता है, जो माइक्रोग्रैविटी में भी खाने को संभालने में मदद करते हैं।
- फूड पैकेट्स: खाने के पैकेट्स को आसानी से संभालने और खोलने के लिए डिजाइन किया गया है। ये पैकेट्स एक स्ट्रॉ या नोजल के साथ आते हैं, जिससे खाना बाहर आता है।
- किस तरह का खाना खाते हैं: अंतरिक्ष यात्री पनीर, चिकन, फल, सब्जियां, और मिठाइयां खा सकते हैं। ज्यादातर खाना फ्रीज-ड्राइड या थर्मोस्टेबलाइज्ड होता है।
(फोटो+इनपुट= क्रेडिट नासा वेबसाइट्स)












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