Sonam Wangchuk ने फिर क्यों शुरू की भूख हड़ताल? लद्दाख से जंतर-मंतर तक, कैसे बदला आंदोलन, पढ़ें पूरी Timeline

Sonam Wangchuk Hunger Strike: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) रविवार, 28 जून 2026 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं।

इस बार उनकी मांग केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की नाकामियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

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इस आंदोलन में वांगचुक 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। आइए एक नजर डालते हैं सोनम वांगचुक के इस पूरे आंदोलन की टाइमलाइन पर, कि कैसे लद्दाख की बर्फीली वादियों से शुरू हुआ यह संघर्ष दिल्ली के जंतर-मंतर और देश की शिक्षा व्यवस्था की लड़ाई में बदल गया।

Sonam Wangchuk Protest: सोनम वांगचुक के अब तक के आंदोलन की पूरी टाइमलाइन: 2024 - 2026

मार्च - अप्रैल 2024: माइनस डिग्री तापमान में 'क्लाइमेट फास्ट'

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने लेह में शून्य से नीचे (-15°C) तापमान में 21 दिनों का 'क्लाइमेट फास्ट' (जलवायु उपवास) शुरू किया। इसके बाद पूरे लद्दाख में रिले भूख हड़ताल का दौर चला।

30 सितंबर 2024: 'दिल्ली चलो पदयात्रा' और हिरासत

लद्दाख की मांगों को लेकर वांगचुक ने लेह से दिल्ली तक 120 से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ 'दिल्ली चलो पदयात्रा' शुरू की। 30 सितंबर को दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचते ही उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को उन्हें रिहा कर राजघाट जाने की अनुमति दी गई।

5 अक्टूबर - 21 अक्टूबर 2024: दिल्ली में 16 दिनों का उपवास

केंद्र सरकार से बातचीत का कोई ठोस जवाब न मिलने पर वांगचुक ने दिल्ली में ही अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। 21 अक्टूबर को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा दिसंबर में लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत का ठोस भरोसा दिए जाने के बाद उन्होंने अपना 16 दिनों का उपवास तोड़ा।

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सितंबर 2025: लेह में हिंसक प्रदर्शन और वांगचुक की गिरफ्तारी

केंद्र सरकार के साथ लद्दाख की स्वायत्तता को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह विफल हो गई। इसके विरोध में 10 सितंबर 2025 को वांगचुक ने लेह के शहीद पार्क में 35 दिनों की भूख हड़ताल का एलान किया। इस दौरान लद्दाख के युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा और लेह में BJP दफ्तर तथा हिल काउंसिल पर पथराव हुआ, साथ ही सुरक्षा बलों की गाड़ियों को आग लगा दी गई।

गृह मंत्रालय ने हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए वांगचुक की संस्था SECMOL का एफसीआरए (FCRA) लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया। इसके अगले ही दिन 26 सितंबर 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से ठीक पहले वांगचुक को सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

शुरुआती 2026: डिटेंशन से रिहाई

करीब छह महीने जेल और पुलिस हिरासत में बिताने के बाद, साल 2026 के शुरुआती महीनों में सोनम वांगचुक को रिहा किया गया।

जून 2026: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के साथ जंतर-मंतर पर एंट्री

जेल से बाहर आने के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन का दायरा बड़ा किया। जून 2026 में देश के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले NEET पेपर लीक विवाद और परीक्षाओं की गड़बड़ियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके द्वारा स्थापित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का आंदोलन चल रहा था।

6 जून को वांगचुक इस छात्र आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने कहा, बिना न्याय के ऐसी शिक्षा का क्या फायदा? उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण और देश की शिक्षा व्यवस्था को 'विकसित भारत' के दो सबसे जरूरी स्तंभ बताते हुए दोनों लड़ाइयों को एक साथ जोड़ने का फैसला किया।

28 जून 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

हाल ही में स्विट्जरलैंड के जिनेवा की यात्रा से लौटे वांगचुक ने सरकार को 27 जून तक का अल्टीमेटम दिया था। सरकार की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर, आज 28 जून को सुबह 11 बजे से वे जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं।

Sonam Wangchuk की क्या हैं इस बार की मुख्य मांगें?

देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ और पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। शिक्षा और परीक्षा प्रणाली (जैसे CBSE मार्किंग और NEET पोर्टल) में पूरी पारदर्शिता के साथ बड़े प्रशासनिक सुधार किए जाएं।

लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति की सुरक्षा और वहां के लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार (छठी अनुसूची) देने के पुराने वादे को केंद्र सरकार तुरंत पूरा करे। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश भर के छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे आज बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक के इस अनशन का समर्थन करें।

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