आते लग रहे अच्छे दिन : खाने-पीने की चीजें सस्ती होना शुरू
नई दिल्ली, 14 जुलाई: मई के मुकाबले थोक महंगाई दर में मामूली राहत मिली है। हालांकि जून 2021 की तुलना में इस बार का आंकड़ा काफी ज्यादा है, लेकिन बढ़ती थोक महंगाई के बीच घटते दामों को लेकर एक उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से 14 जुलाई को जारी आंकड़ों के मुताबिक होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर आधारित भारत की मुद्रास्फीति (महंगाई) जून 2022 में घटकर 15.18 प्रतिशत रह गई है।

सरकार ने बताया कि मई 2022 में WPI 15.88% से मामूली कम है। मई में WPI मुद्रास्फीति 15.88 प्रतिशत थी, जो कम से कम तीन दशकों में सबसे अधिक है। जून 2021 में यह दर 12.07 प्रतिशत थी।
भारत सरकार ने बताया कि जून 2022 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में खनिज तेलों, खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल, रसायनों और रासायनिक उत्पादों, खाद्य उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।
वहीं जून में थोक मूल्य मुद्रास्फीति के दोहरे अंकों के एक और महीने का मतलब है कि थोक मूल्य लगातार 15 महीनों के लिए 10 प्रतिशत के निशान से ऊपर रहे हैं। फिहला पिछले महीने की तुलना में राहत मिलती नजर आ रही है।
खुदरा महंगाई दर में गिरावट
इससे पहले खुदरा महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गई थी। जून के महीने में मुद्रास्फीति 7.01 प्रतिशत रही, जो मई की तुलना में 0.3 फीसदी कम है। मई में यह दर 7.04 फीसदी रही थी।
इधर, खाद्य मुद्रास्फीति जून में 10.89 प्रतिशत से बढ़कर 12.41 प्रतिशत हो गई, जिसमें फूड इंडेक्स महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ मैन्युफैक्चरिंग मुद्रास्फीति गिरकर 9.19 प्रतिशत पर आ गई, जो 15 महीने में सबसे कम है। जो छह महीने में इस तरह की पहली गिरावट है।












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