नेताओं और नौकरशाहों की मौज के लिए ये बने भिखारी
मंत्रियों और अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ पदर्शन के मकसद से उत्तराखंड के बागेश्वर में दो लोग भीख मांग रहे हैं।
नई दिल्ली। नेताओं और नौकरशाहों की मौज जारी रहे इसके लिए दो लोग भीख मांग रहे हैं। वो घर-घर जाते है और लोगों से नेताओं और अधिकारियों की ऐश-ओ-आराम के नाम पर भीख मांगते हैं। लोग पहले तो इनको भीख देने से कतराते है लेकिन असली वजह जानने के बाद भीख दे भी रहे हैं।

भीख मांगकर सरकार की मदद
मंत्रियों और अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ पदर्शन के मकसद से उत्तराखंड के बागेश्वर में दो लोग भीख मांग रहे हैं। इन दोनों लोगों ने भीख मांगकर 2,642 रुपए इक्टठा किया और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भेजा है। इनका कहना है कि सूबे की सरकार कर्ज के बोझ तले दबी हुई है, सरकार भिखारी बन चुकी है इसलिए हम सरकार की मदद के लिए भीख के जरिए पैसा जुटा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख
रमेश पांडे और एनबी भट्ट का कहना है कि सरकार कर्ज के बोझ से दबी है ऐसे में मंत्रियों और अधिकारियों का खर्चा निकालने के लिए वो सड़को पर भीख मांग रहे हैं। इन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड को बने 16 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है लेकिन अभी सक किसी भी सरकार ने सूबे का विकास नहीं किया यहां केवल लूट और खसोट चलती रही।
जब लोग हुए हैरान
रमेश पांडे और एनबी भट्ट समाजसेवी है और अच्छे दोस्त हैं उन्होंने चिपको आंदोलन सहित कई बड़े आंदोलनों में हिस्सा लिया है। आजकल ये लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने के लिए भीख मांग रहे हैं। तीन जून को दोनों लोग हाथ में प्लेकार्ड लिए घर-घर घूमें। उस प्ले कार्ड पर लिखा था, 'नेताओं के ऐश-ओ-आराम के लिए भीख दो' स्थानीय लोग पहले तो पोस्टर को देख कर हैरान हुए लेकिन बाद में जब मतलब समझ आया तो भीख दिया। दोनों समाजसेवियों का कहना है कि आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं लेकिन सरकार गंभीर नहीं है।












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