नीतीश कुमार की सभा में चप्पलों के मतलब तो समझिये
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सभा में हंगामा हुआ। नमो नमो के नारे लगे। और चप्पलें दिखाई गईं। मीडिया ने खबर छाप दी, चुनाव आयोग ने मामले को डायरी में नोट कर लिया। लेकिन बात अभी खत्म नहीं हुई है। चुनावी सभा में चप्पलों का मतलब समझना बहुत जरूरी है। हमारे आपके लिये भले न सही, लेकिन बिहार की जनता के लिये तो जरूर।
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पहला मतलब
मुख्यमंत्री को चप्पलें दिखाये जाने का सबसे पहला मतलब यह है कि यह चुनाव स्वस्थ्य चुनाव नहीं है। यहां पर कुर्सी के लिये कोई भी कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। जैसा कि पता चला है कि रैली में भाजपा के कुछ कार्यकर्ता घुस आये थे, जिन्होंने मोदी-मोदी के नारे लगाये। इससे साफ है कि बिहार में भाजपा की हालत पतली होती जा रही है और खुद को ऊंचा दिखाने के लिये सामने वाले को नीचा दिखाने के प्रयास तेज हो गये हैं।
दूसरा मतलब
चप्पलों का दूसरा मतलब यह है कि बिहार की जनता नीतीश कुमार के कार्यों से खुश नहीं है। नौबत यह आ गई है कि लोग महज एक पार्टी के इशारे पर मुख्यमंत्री की सभा में चप्पलें लेकर पहुंच जाते हैं। अगर जनता खुश होती, तो ऐसी नौबत कभी नहीं आती। [पढ़ें- लालू के एक दामाद समर्थक तो दूसरे कट्टर विरोधी]
तीसरा मतलब
हो सकता है बिहार की जनता को नीतीश पसंद हों, लेकिन उनका लालू प्रसाद यादव का साथ नहीं। क्योंकि 10 साल पहले जिस जंगल राज से नीतीश कुमार ने इस भोली-भाली जनता को छुटकारा दिलाया था, आज नीतीश उसी जंगल राज से हाथ मिला बैठे हैं।
खैर चप्पल क्या चुनाव में आगे अगर जूते, टमाटर, स्याही, भी चले तो चकित मत होइयेगा, क्योंकि बिहार की कुर्सी के लिये हर पार्टी पूरे जोर लगाये हुए है।

देखें क्या हुआ था रैली में और क्या कहा था नीतीश ने
वारिसलीगंज रेफरल अस्पताल मैदान में हुई सभा में चुनाव का प्रचार करने नवादा पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लोगों के विरोध को झेलना पड़ा। नीतीश विरोधियों ने रैली में मोदी-मोदी के नारे भी लगाए। घटना नवादा के वारसलीगंज की है। यहां नीतीश कुमार महागठबंधन की ओर से जनता दल यूनाइटेड के प्रदीप कुमार चुनाव लड़ रहे हैं। उनके लिए ही आज नीतीश वोट मांगने पहुंचे थे।
हालांकि, नीतीश ने सयंम दिखाते हुए विरोध कर रहे लोगों को रैली स्थल से चले जाने को कहा। इस व्यवधान के बाद सूबे के मुख्यमंत्री ने अपना भाषण रोक दिया और कहा कि जब विपक्षी हमसे चुनाव में लड़ने में अक्षम हो गए तो उन्होंने इन 20-25 लोगों को भेज दिया है। नीतीश कुमार ने वहां मौजूद भीड़ से पूछा कि आप मेरा भाषण चाहते हैं या नहीं। उनके इतना कहते ही जदयू समर्थकों ने भाजपा समर्थकों को खदेड़ दिया जिसके बाद नीतीश कुमार ने अपना भाषण आगे बढ़ाया। बाद में जनता दल के कार्यकर्ताओं ने विरोधियों को भगा दिया। इसके बाद नीतीश कुमार अपना भाषण दे पाए।












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