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26/11 हमले के 6 साल बाद कैसे परिवर्तन आये?

मुंबई। छह साल पहले शाम के वक्त मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास गोलियों की बौछार करते हुए कुछ आतंकी होटल ताज और होटल ओबरॉय में घुसे। कुछ आतंकियों ने सीएसटी रेलवे स्टेशन पर लाशें बिछईं तो कुछ ने नरीमन हाउस में घुस कर आतंक का खेल खेला। 26/11/2008 का वो दिन शायद ही कोई भारतीय भूल पायेगा। बुधवार को मुंबई हमले को छह साल पूरे हो जायेंगे। इन छह सालों में हजारों बार घाव कुरेदे गये, लेकिन कई सवाल आज भी अनसुलझे हैं, जो हम आपके सामने रख रहे हैं।

Six years after the 26/11 attack, several questions remained un-answered

आतंकी हमलों से निबटने के लिये हम कितने तैयार हैं, हमारे देश के नागरिक आज कितने सुरक्ष‍ित हैं, 26/11 हमलों की जांच कहां तक पहुंची, जैसे कई सवाल हैं जिनके जवाब वी बालाचंद्रन ने वनइंडिया से खासबातचीत में दिये। वी बालाचंद्रन रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में रह चुके हैं और प्रधान कमेटी के सदस्य हैं।

26/11 हमलों के बाद से क्या परिवर्तन दिखा आपको? क्या हम ऐसे हमलों से निबटने के लिये अब ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार हैं?

इस सवाल के जवाब में बालाचंद्रन ने कहा- हम (पब्ल‍िक और पुलिस) मानसिक तौर पर तो ऐसे हमलों से निबटने के लिये तैयार हैं, क्योंकि हमारी प्रतिरोधी क्षमता इस हमले के बाद से बढ़ गई है। पहले जब भी आतंकी हमलों की बात आती थी, तो जनता और पुलिस दोनों का सामना आईईडी ब्लास्ट या अन्स धमाकों से हुआ, लेकिन 26/11 के दौरान जनता और पुलिस दोनों ने मिल कर आतंक के ख‍िलाफ जंग लड़ी।

लोग सिर्फ डर कर भागने के बजाये दूसरों को बचाते हुए दिखाई दिये। लोगों ने खुद गोलियां खायीं, दूसरों के दर्द को अपना समझा। इससे पहले ऐसा सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ही देखने को मिलता था। यह जरूर है कि लोग अब ज्यादा सचेत हैं। लोग समझ चुके हैं कि आतंकवादी किस रास्ते से आ सकते हैं और वो कहां कैसे हमला कर सकते हैं।

इससे यह भी साफ है कि आतंकवादी अब 26/11 जैसी योजना को फिर से दोहरायेंगे नहीं। उसके बाद जब-जब आतंकियों ने मुंबई पर हमले करने के प्रयास किये, तब-तब वे अपनी नई योजना में विफल हो गये और वही पुराने तरीके अपनाये जो पहले अपनाते थे। उसी के परिणाम 2011 में दादर, जावेरी बाजार और ओपेरा हाउस में हुए धमाके हैं। हालांकि यह कड़वा सत्य है कि आतंकवादी जानते हैं कि हम प्रत्येक जगह की सुरक्षा नहीं कर सकते। मुंबई की हर सड़क, हर गली, बस, ट्रेन, आदि की सुरक्षा करना संभव नहीं है।

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