26 /11 छह वर्ष बाद आई पुलिस मॉर्डनाइजेशन की याद
मुंबई। 26/11, मुंबई वर्ष 2008 में एक बड़े आतंकी हमले से दहल गई थी। हमले को भले ही छह वर्ष बीत गए हों लेकिन जख्म अभी तक हरे हैं। पहले भाग में आपने पढ़ा कि मुंबई पर हुए इन हमलों के छह वर्ष बाद क्या क्या बदलाव आए (CLICK ON PREVIOUS)। हमलों ने अगर देश की इंटेलीजेंस की पोल खोलकर रख दी थी तो वहीं इसने देश की पुलिस व्यवस्था और इसके आधुनिकरीकरण पर भी एक सवाल खड़ा कर दिया था।

खराब बुलेट प्रूफ जैकेट, खराब बंदूकें और कई और कमियां इस हमले के साथ सामने आ गईं।
वी बालचंद्र, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व अधिकारी उस उच्चस्तरीय प्रधान समिति का हिस्सा भी रहे हैं जिसे मुंबई हमलों में पुलिस की ओर से दी गई प्रतिक्रिया और पुलिस की व्यवस्थाओं के लिए बनाया गया था।
बालचंद्र की मानें तो सरकार ने प्रधान समिति की रिपोर्ट का क्या किया या फिर इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई भी की गई, इस बारे में सरकार की ओर से कोई जानकारी समिति को दी ही नहीं गई।
वनइंडिया के साथ हुई बातचीत में बालचंद्र ने बताया कि सरकार ने कभी भी इस बात को समिति के साथ साझा करने की जरूरत ही नहीं समझी कि आखिर उस रिपोर्ट का क्या किया गया।
मीडिया की ओर से ही समिति को इस बारे में जानकारी मिली की राज्य में आई नई सरकार ने ब्यूरोक्रेटिक देरी को किनारे करते हुए राज्य की पुलिस के लिए उन सभी हथियारों और उपकरणों की मांग से जुड़े प्रस्तावों पर मंजूरी दे दी है जिसका अनुरोध इस रिपोर्ट में किया गया था।
बालचंद्र ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में आई देवेंद्र फड़णवीस की सरकार ने पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए जरूरी 192 करोड़ रुपए सुनिश्चित कर दिए हैं।












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