सीताराम केसरी थे आखिरी गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष, अबतक कितनों को मिला मौका?
नई दिल्ली- राहुल गांधी पहले ही साफ कर चुके हैं उनकी जगह उनके परिवार का कोई दूसरा सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष का पद अभी नहीं संभालेगा। यानी ये फिलहाल तय लग रहा है कि कांग्रेस में 21 साल बाद किसी गैर-गांधी को यह कुर्सी मिलने जा रही है। इस पद की रेस में तो कई कांग्रेसी नेताओं के नामों की चर्चा हो रही है, लेकिन हम यहां यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अबतक कितने गैर-गांधियों को कांग्रेस की अध्यक्षता करने का मौका मिला है।

सीताराम केसरी को दो वर्षों तक मिला मौका
1996 में सीताराम केसरी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था और वह सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने तक इस पद पर रहे। वे आखिरी कांग्रेस अध्यक्ष थे, जो गांधी परिवार से नहीं थे। उन्होंने नरसिम्हा राव के बाद पार्टी की बागडोर संभाली थी और 1996 से 1998 तक इस पर रहे थे। उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर कुछ विवाद भी है और बीजेपी एवं नरेंद्र मोदी अक्सर इसको लेकर कांग्रेस पर तंज कसते रहे हैं।

सबसे प्रभावी गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष
राजीव गांधी के निधन के बाद 1991 में पीवी नरसिम्हा राव को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। वे 1996 में सीताराम केसरी के अध्यक्ष बनने तक इस पद पर रहे। इस दौरान वे पूरे पांच साल तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे। किसी भी दूसरे गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्षों के मुकाबले नरसिम्हा राव के कार्यकाल को थोड़ा अलग माना जा सकता है। इस दौरान उन्होंने ज्यादातर विषयों में अपनी स्वतंत्र भूमिका दिखाई थी।

आजादी के बाद कुल 13 बार हुआ ऐसा
1947 में देश की आजादी के समय आचार्य जेबी कृपलानी पहले गैर-नेहरू,गैर-गांधी अध्यक्ष थे। उनके बाद अगले दो साल के लिए आंध्र प्रदेश के नेता पट्टाभि सीतरमैया को यह मौका मिला था। 1950 में पुरुषोत्तम दास टंडन अध्यक्ष बने। 1955 से 1959 तक यूएन ढेबर ने कांग्रेस की अध्यक्षता की। ढेबर के बाद ही 1959 में इंदिरा गांधी को कांग्रेस की कमान दी गई।

इंदिरा-नेहरू के समय भी मिला गैर-गांधियों को मौका
इंदिरा गांधी के बाद 1960 से 1963 तक पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को यह जिम्मेदारी मिली। फिर के. कामराज 1964 से 67 तक और एस निजालिंगप्पा 1968 से 69 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1970-71 में पूर्व स्पीकर मीरा कुमार के पिता यानी जगजीवन राम को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। वे बिहार से थे। जगजीवन राम के बाद शंकर दयाल शर्मा को 1972-74 में कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। ये भी बाद में राष्ट्रपति बने। जबकि, इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष देवकांत बरूआ को बनाया गया था। उनके बाद 1977 से 78 तक केबी रेड्डी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
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