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सीता सोरेन कौन हैं ? JMM प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहू जिन्होंने अपनी ही सरकार का बढ़ा दिया है संकट

रांची, 14 सितंबर: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार का एक संकट कम होता है तो दूसरा सामने आ जा रहा है। पहले से ही मुख्यमंत्री की विधायकी पर अयोग्यता की तलवार लटकी हुई है और अब उनकी भाभी सीता सोरेन ने ही अवैध खनन का बहुत ही गंभीर मुद्दा उठा दिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने सीएम सोरेन से तो कार्रवाई की मांग की ही है, उन्होंने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय तक को इस संबंध में ऐक्शन लेने के लिए लिख दिया है। अगर उनकी मांग पर केंद्र सरकार कोई कदम उठाती है तो हेमंत सरकार की मुश्किल और बढ़ सकती है। आइए जानते हैं कि सीता सोरेन की झारखंड और जेएमएम की राजनीति में क्या भूमिका है और उनका यह तेवर क्यों महत्वपूर्ण है?

सीता सोरेन ने की अवैध खनन पर कार्रवाई की मांग

सीता सोरेन ने की अवैध खनन पर कार्रवाई की मांग

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन दोनों की ही विधायकी खतरे में है। दोनों पर फैसला झारखंड के राजभवन में लंबित है। लेकिन, विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक जीत के लिए हेमंत सरकार ने भले ही विधानसभा से विश्वास मत जीत लिया हो, लेकिन, उसका संकट कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। अब झारखंड मुक्ति मोर्चा की तीन बार की एमएलए और पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरने की बड़ी बहू सीता सोरेन ने ऐसे समय में धनबाद-कतरास इलाके में कोयले के अवैध खनन का मामला उठाया है, जिससे भ्रष्टाचार के आरोपों में पहले से घिरी उनकी अपनी सरकार और भी असहज हो सकती है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस अवैध खनन के आरोपों को उन्होंने अपने स्तर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर प्रवर्तन निदेशालय तक के संज्ञान में लाने का दांव चला है।

सीता सोरेन कौन हैं ?

सीता सोरेन कौन हैं ?

सीता सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी भाभी हैं। वह दुमका की जामा विधानसभा सीट से तीसरी बार की एमएलए हैं और अपने ससुर की पार्टी जेएमएम की महासचिव भी हैं। लेकिन, यह तो उनका आधिकारिक परिचय है। जेएमएम की राजनीति में उनका असल परिचय ये है कि वह शिबू सोरेन के बड़े बेटे दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं। हेमंत सोरेन का कद पार्टी में उनके बड़े भाई के निधन के बाद ही बढ़ा है। यह बात सीता सोरेन कभी नहीं भुला पाई हैं। अपने पति की कार्यकर्ताओं में लोकप्रियता की वजह से वह झारखंड की राजनीति में काफी दबदबा रखती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें अपने देवर की कैबिनेट में जगह नहीं मिली है।

क्यों हो रही है अपर्णा यादव से तुलना ?

क्यों हो रही है अपर्णा यादव से तुलना ?

शायद सीता सोरेन जानती हैं कि अगर आज उनके पति होते तो सीएम की कुर्सी पर 'गुरुजी' किसी और को नहीं बैठने देते। उनकी यह राजनीतिक महत्वाकांक्षा जग जाहिर है। उन्होंने अवैध कोयला खनन का जो मुद्दा उठाया है, उससे पहले भी वह कई मौकों पर अपनी ही पार्टी की सरकार को घेर चुकी हैं। इस बार उन्होंने जिस तरह से राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है, इस वजह से उनकी तुलना उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव परिवार की बड़ी बहू अपर्णा यादव से होने लगी है। अपर्णा ने देवर अखिलेश यादव के खिलाफ बगावत करके यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा छोड़कर भाजपा का कमल थाम लिया था।

सीता सोरेन का वह ट्वीट, जिससे झारखंड की राजनीति में मचा तूफान

सीता सोरेन का वह ट्वीट, जिससे झारखंड की राजनीति में मचा तूफान

पहले जरा सीता सोरेन का वह ट्वीट देखिए, जिसने झारखंड की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने लिखा है, 'धनबाद एसएसपी की मौन सहमति तथा अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन के कारण जिले में कोयले का अवैध खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है। राज्य सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। कृप्या मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करें। ' उन्होंने अपने ट्वीट को केंद्रीय गृह मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय के डीजी, सीआईएसएफ हेडक्वार्टर के साथ-साथ मुख्यमंत्री सोरेन को भी टैग किया है।

सड़क से सदन तक सरकार को घेर चुकी हैं

सड़क से सदन तक सरकार को घेर चुकी हैं

यह पहला मौका नहीं है, जब इस तरह के अवैध खनन के मुद्दे पर उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक में कड़े तेवर दिखाए हैं। वह चतरा जिले के टंडवा-पिपरवार इलाके में जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा करके कोयले की अवैध ढुलाई का भी मुद्दा उठा चुकी हैं। वह इस मसले पर राज्यपाल से भी शिकायत कर चुकी हैं और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय तक से कार्रवाई की मांग कर चुकी हैं। मानसून सत्र के दौरान उन्होंने विधानसभा के मुख्य द्वार पर भी प्रदर्शन किया था। इसके साथ ही वह शुरू से अपने बयानों की वजह से हेमंत सरकार को परेशानी में डालती रही हैं।

दुर्गा सोरेन के निधन की वजह से हेमंत सोरेन को मिला मौका

दुर्गा सोरेन के निधन की वजह से हेमंत सोरेन को मिला मौका

झारखंड मुक्ति मोर्चा में शिबू सोरेन के बाद दुर्गा सोरेन का ही कद था। उनपर अपने पिता का भी शुरू से आशीर्वाद था। लेकिन, 2009 में उनकी असामयिक मृत्यु ने हेमंत की सियासी किस्मत चमका दी। लेकिन, इसके बावजूद सीता ने अपने पति की राजनीतिक पहचान मिटने नहीं दी। उन्होंने अपने पति के नाम को हमेशा कायम रखने की कोशिश की है और यहां तक कह चुकी हैं कि शिबू सोरेन और दुर्गा सोरेन ने ही झारखंड मुक्ति मोर्चा को यहां तक पहुंचाया है, लेकिन यह गलत लोगों के हाथों में जा चुका है। वह अपने पति के नाम से दुर्गा सोरेन सेना भी चला रही हैं, जिसकी कमान अपनी दो बेटियों को दे रखी हैं। (सीता सोरेन की पहली तस्वीर सौजन्य: उनके ट्विटर से)

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