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Pak Sir Creek पर नापाक नजरें रखता है! समुद्र से सीधा जेल पहुंचने वाले मछुआरों को कैसे बचा सकते हैं? जानिए

198 भारतीय मछुआरों की रिहाई के साथ सवाल फिर से कौंधता है कि आखिर इस परेशानी से निजात कैसे मिलेगी? ये भी पहलू सामने आता है कि कौन से इलाके ऐसे हैं जहां समुद्री सीमा को लेकर भारत-पाक के बीच टकराव है। सवालों के जवाब जानिए

Pak Sir Creek

Sir Creek Gujarat: समंदर की लहरों पर सवार होकर हजारों मछुआरों की टीम हर साल मछली पकड़ने के लिए कड़े जतन कर अपने पेट पालती है। हालांकि, इन कोशिशों को कई बार नजर लग जाती है जब मछुआरे गलती से पाकिस्तान पहुंच जाते हैं और इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।

दरअसल, भारतीय जल सीमा से आगे निकलकर मछुआरे पाकिस्तान की जल सीमा में चले जाते हैं। कई महीने यहां तक की कुछ मामलों में कई साल तक इन्हें जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ता है। परेशानी जल सीमा के उल्लंघन के साथ-साथ निशानदेही के पर्याप्त बंदोबस्त का अभाव है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार भारत पाक मछुआरों की समस्या की जड़ भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक (Sir Creek) को लेकर हुआ विवाद है। भारत थलवेग सिद्धांत (Thalweg doctrine) का पालन करके मुहाना को विभाजित करना चाहता है।

थलवेग सिद्धांत के अनुसार, यदि कोई जल निकाय दो देशों के बीच से गुजर रहा है तो उसे इस प्रकार विभाजित किया जाना चाहिए कि दोनों देशों को पानी का बराबर हिस्सा मिले। हालांकि, पाकिस्तान Thalweg मानने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच विवाद लंबे समय से होता आ रहा है।

समुद्री सीमा का विभाजन कच्छ के रण और पाकिस्तान के सिंध के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा को प्रभावित कर रहा है। इससे दोनों देशों के आर्थिक क्षेत्रों पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि जल सीमा के उल्लंघन और मछुआरों से जुड़े मुद्दे का समाधान भारत-पाक को मिलकर करना पड़ेगा। दोनों देशों द्वारा मछुआरों को संचार और नेविगेशन किट प्रदान करना चाहिए। इससे समुद्र में उन्हें सीमा रेखाओं के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

समस्या को कम करने के लिए, दोनों देशों को जागरूकता भी फैलानी चाहिए। मछुआरों को बड़े पैमाने पर संचार और नेविगेशन किट से प्रशिक्षित करना चाहिए, ताकि वे सीमा पार न करें।

अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने और सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से किसी भी घुसपैठ गतिविधियों से बचाने के लिए, भारतीय तटरक्षक बल गुजरात के Jakahau समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी अलर्ट रहता है।

तटरक्षक महानिदेशक राजेंद्र सिंह बताते हैं कि होवरक्राफ्ट की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी होती है। इसके अलावा सर क्रीक क्षेत्र में
तीन इंटरसेप्टर वेसल्स भी तैनात किए हैं। जकाहू बेस सर क्रीक क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है।

होवरक्राफ्ट प्रति घंटे 30-40 समुद्री मील (लगभग 50-60 किलोमीटर) के बीच उच्च गति पर काम करता है और आसपास के पानी में किसी भी संदिग्ध नाव या व्यक्तियों का तेजी से पीछा करने में अत्यधिक उपयोगी हो सकता है।

तटरक्षक बल में शामिल अधिकारी बताते हैं कि होवरक्राफ्ट समुद्र के पानी के अलावा तटों दोनों पर भी काम कर सकता है। इसलिए वहां तैनात सैनिकों के लिए घुसपैठ की ताक में लगे लोग या किसी भी दुष्ट तत्व को पकड़ना तुलनात्मक रूप से आसान होता है।

गौरतलब है कि परंपरागत रूप से, गुजरात के कच्छ जिले में सर क्रीक क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ करने की ताक में रहता है। यहां से घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करते हैं।

क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच एक विवादास्पद मुद्दा रहा है और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध में भी यहां कार्रवाई देखी गई थी। बहरहाल, मछुआरों से जुड़े मुद्दे पर इतना स्पष्ट है कि दोनों देशों को कम्युनिटी लेवल पर काम करना होगा।

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