मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- सिंगल पैरेंटिंग समाज के लिए खतरनाक, बच्चे को माता-पिता दोनों के प्यार की जरूरत
नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट ने बच्चों की सिंगल पैरेंटिंग पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सिंगल पैरेंटिंग समाज के लिए खतरनाक है। मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन किरुबाकरन ने कहा कि सिंगल पैरेंटिंग का बढ़ता चलन समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि एक बच्चे को माता-पिता दोनों के प्यार की जरूरत होती है, कोई अकेले इसकी पूर्ति नहीं कर सकता है।

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन किरुबाकरन ने कहा कि किसी भी बच्चे को अगर माता और पिता में से किसी एक का भी प्यार नहीं मिलता है तो उस बच्चे के व्यवहार में खास तरह का बदलाव आ सकता है। सिंगल पैरेंटिंग से बच्चा समाज के खिलाफ भी जा सकता है। कोर्ट के 16 सितंबर, 2015 के आदेश का पालन नहीं करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के खिलाफ गिरिजा राघवन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टि एन किरुबाकरन ने टिप्पणी की।
बाल दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति एन किरुबाकरन ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय को दो हिस्सों में बांट देना चाहिए। उन्होंने सहायक सॉलिसिटर जनरल से कहा कि महिला विकास और बाल विकास के लिए अलग-अलग मंत्रालय क्यों नहीं हो सकते हैं?












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