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ममता-मोदी की जंग में जिसे मिलेंगे 'बंगाली हिंदू वोट' वही जीतेगा बंगाल

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नई दिल्ली- पश्चिम बंगाल की 30 फीसदी मुस्लिम आबादी बीजेपी के वोट रडार पर नहीं है। बाकी बचे 70 फीसदी बंगाली हिंदू वोट को लेकर ही टीएमसी (TMC) और बीजेपी (BJP) में सियासी तलवारें खिंची हुई हैं। ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने इस आबादी को कभी सीरियसली लिया ही नहीं था। उन्हें 30 फीसदी वोट पर इस हद तक यकीन था कि उन्हें कभी 70% आबादी के वोट की कभी चिंता नहीं करने पड़ी। लेकिन, राज्य में बीजेपी (BJP) का ग्राफ बढ़ने से दीदी को अपनी सोच और चुनावी बिसात दोनों बदलनी पड़ गई है। अब टीएमसी (TMC) सुप्रीमो भी खुलकर हिंदुवादी हावभाव खुले मंच पर अपना रही हैं, अलबत्ता यह भी ख्याल रख रही हैं, कि उनका कोर वोट बैंक उनसे मायूस न हो जाए। दरअसल, ममता दीदी को मजबूरन यह सब करना पड़ रहा है, क्योंकि खासकर युवाओं में बीजेपी (BJP) के 'राष्ट्रवादी' हिंदुत्व का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

कैसे बदल गई है बंगाल की राजनीति?

कैसे बदल गई है बंगाल की राजनीति?

ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) बंगाल में जहां भी रैली करती हैं, उनके निशाने पर सिर्फ बीजेपी होती है। वो न लेफ्ट का जिक्र करती हैं और न ही उन्हें कांग्रेस की चर्चा करने की जरूरत नजर आती है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक एक रैली में वो कहती हैं, " वे (बीजेपी) सोचते हैं कि हिंदू-मुस्लिम को लड़ाकर बंगाल जीत लेंगे। वे वोट चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें बड़ा रसगुल्ला देंगे, पत्थरों से भरा हुआ।" विश्लेषकों की मानें तो अभी भी वहां लेफ्ट के पास 15-20% वोट है, लेकिन उसके एक सीट जीतने पर भी संकट नजर आ रहा है। जबकि, राज्य की 42 में से कम से कम 25 सीटों पर सीधे बीजेपी और टीएमसी के बीच ही लड़ाई है।

ममता का सॉफ्ट बंगाली 'हिंदुत्व'

ममता का सॉफ्ट बंगाली 'हिंदुत्व'

भाजपा की ओर से जय श्री राम के नारे और ममता पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप का जवाब, टीएमसी आजकल 'जय बांग्ला' और 'जय मां काली' के नारों से देने लगी है। यदि कहें कि बीजेपी अगर हिंदुत्व एवं राष्ट्रवाद पर खेल रही है, तो ममता उसे सॉफ्ट 'हिंदुत्व' और 'बांग्ला प्राइड' से जवाब देने की कोशिश कर रही हैं। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव ने वाकई दीदी को अंदर से डरा जरूर दिया है, ऐसा टीएमसी के बदले रवैये को देखकर आसानी से कहा जा सकता है। अब मुख्यमंत्री के मंच पर श्लोक भी सुनाई पड़ते हैं और शंखनाद भी होता है। वो खुद महिलाओं को 'उलुर्ध्वनी' (ululations) शुरू करने के लिए भी कहती हैं। हालांकि, सेक्युलर दिखने के लिए वो इस्लाम के नारे और गॉड इज ग्रेट के उपयोग किए जाने का भी पूरी ख्याल रखती हैं। इसके साथ ही वह बंगाल गौरव का जिक्र करना भी नहीं भूलतीं और 'इबार बांग्ला दिल्ली दोखोल कोरबो' से अपना भाषण खत्म करती हैं।

इसे भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में TMC या BJP, किसका पलड़ा भारी?

युवाओं पर भाजपा के 'राष्ट्रवादी' हिंदुत्व का प्रभाव

युवाओं पर भाजपा के 'राष्ट्रवादी' हिंदुत्व का प्रभाव

दरअसल, दीदी का डर यूं ही नहीं बढ़ा हुआ है। युवा बंगालियों में भाजपा का प्रभाव बहुत ही गहराई से महसूस किया जा सकता है। 'जय श्री राम' का नारा लगाने पर बंगाल में एक युवा की गिरफ्तारी को लेकर 30 वर्षीय साइबरसेक्युरिटी एक्सपर्ट (cybersecurity expert) डॉक्टर आदित्य मुखर्जी गुस्से में कहते हैं, "जय श्री राम का नारा लगाने वालों को हिरासत में क्यों लिया जाता है? टीएमसी सरकार कहां से आती है? क्या पाकिस्तान से।" उन्होंने कहा कि वो और उनके दोस्त एवं सहयोगी मोदी को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि पीएम एक 'मजबूत राष्ट्रवादी नेता' हैं। वे सभी मानते हैं कि मुसलमानों और कट्टर मौलानाओं के लिए ममता बहुत आगे तक जा चुकी हैं। उनके अनुसार, "हिंदू विचार मानने वालों के लिए कोई आजादी नहीं है।"

सॉफ्टवेयर इंजीनियर और बीजेपी समर्थक देबाशीष बोस कहते हैं," कोलकाता के पाड़ा (locality) क्लब पर टीएमसी के दबंगों का कब्जा है, जो हमें तंग करते हैं। बंगाल को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है। लेफ्ट और कांग्रेस के गायब होने के बाद, बहुत से बीजेपी को अच्छा विकल्प मानते हैं।" युवाओं में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को लेकर टीएमसी के स्थानीय नेता आरोप लगाते हैं कि वो सब सच्चे बंगाली नहीं हैं। इन्हीं में से एक अमूल्य मैती कहते हैं, "आरएसएस बंगाली लड़कों को पकड़ना चाह रही है, उन्हें ब्रेनवॉश के लिए ट्रेनिंग कैंप ले जाती है और उनका ब्रेनवॉश करती है। वे सच्चे बंगाली नहीं हैं।" यही नहीं ये लोग तो मोदी की रैली के लिए झारखंड और ओडिशा से भीड़ जुटाने तक का भी आरोप लगाते हैं।

'भद्र मानुष' बंगाली पर किसका प्रभाव?

'भद्र मानुष' बंगाली पर किसका प्रभाव?

सवाल उठता है कि बुद्धिजीवियों ( intellectual) की पहचान बंगाली 'भद्र मानुष' पर क्या वाकई बीजेपी की विचारधार असर डाल रही है। कांग्रेस के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद एवं मिदनापुर (Midnapore) से मौजूदा टीएमसी उम्मीदवार मानस भुइयां का मानना है कि ममता को हटाने के लिए लेफ्ट बहुत ही चतुराई से बीजेपी की मदद कर रहा है। लेकिन हेल्थकेयर प्रोफेशनल अनुसुया नाग उनसे इत्तेफाक नहीं रखतीं, जिनका मानना है कि बंगाली मिडिल क्लास में भी बीजेपी ने पकड़ बना ली है। वह कहती हैं कि कई पढ़े-लिखे मिडिल क्लास के लोग और ढेर सारे लेफ्ट विचारधारा से प्रभावित सभ्रांत बंगाल बीजेपी को ओर झुक चुके हैं। वे कहती हैं,"बंगाल में बीजेपी को कभी चांस नहीं मिला है और उसे मिलना चाहिए।" आज की हकीकत है कि ऐसे मिडिल क्लास बंगालियों के अलावा स्मार्टफोन रखने वाला युवा बंगाली 'राष्ट्रवादी' हिंदुत्व की भावना की ओर खिंच चुका है। ऐसे में अगर इसबार नहीं, तो अगली बार बीजेपी पश्चिम बंगाल में बहुत ही ऊंचाई पर पहुंच सकती है, इससे शायद किसी को इनकार नहीं करना चाहिए।

यही कारण हैं मोदी और शाह उत्तर प्रदेश के बाद अगर किसी राज्य पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं, तो वह पश्चिम बंगाल है। यूपी में मोदी 13 और शाह 12 रैलियां और रोड शो कर चुके हैं। तो बंगाल में 26 मार्च से 1 मई तक मोदी 10 और शाह 11 सभाएं कर चके थे। इनमें मोदी की बहुचर्चित कोलकाता की ब्रिगेड परेड ग्राउंड की रैली भी शामिल है।

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English summary
Shri Ram vs Ma Kali: Eyes on Bengali Hindu votes
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