'बिलकिस बानो के 11 दोषियों को रिहा करने के दिखाएं दस्तावेज', SC ने केंद्र को भेजा नोटिस
गुजरात दंगों के दौरान गैंगरेप मामले में 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक नोटिस भेजा है।

पिछले साल 15 अगस्त को केंद्र सरकार ने छूट देते हुए बिलकिस बानो के सभी दोषियों को रिहा कर दिया था। सरकार के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में बिलकिस बानो ने आपत्ति जताई थी। जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस भेजा है। जिसमें बिलकिस बानो केस में दोषियों की रिहाई के दस्तावेज दिखाने को कहा गया है।
गुजरात में गोधरा रेलवे स्टेशन पर 28 फरवरी 2002 को साबरमती ट्रेन के एस- 6 कोच में आग लगने और 59 कारसेवकों की मौत के बाद भड़के दंगों में 1500 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस कांड को लेकर गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़का उठा था, जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए। इस दौरान एक बिलकिस बानो के परिवार से सात सदस्यों को हत्या और उसके साथ रेप के मामले में 11 दोषियों को सजा सुनाई गई। जिन्हें सज से छूट का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया था। जिसे बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि याचिका में कई सारे मुद्दे शामिल हैं। जिसे विस्तार से सुनने की जरूरत है। कोर्ट ने गुजरात सरकार को भी निर्देश दिया कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर पार्टियों को छूट देने वाली प्रासंगिक फाइलों के साथ तैयार रहे। पीठ ने कहा कि मामले में भावनाओं के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है, केवल कानून के आधार पर विचार किया जाएगा।
दरअसल, बिलकिस बानो ने पिछले साल 30 नवंबर को शीर्ष अदालत में राज्य सरकार द्वारा 11 आजीवन कारावास की "समय से पहले" रिहाई को चुनौती देते हुए कहा था कि इसने "समाज की अंतरात्मा को हिला दिया है"। दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका के अलावा, सामूहिक बलात्कार पीड़िता ने एक अलग याचिका भी दायर की थी जिसमें एक दोषी की याचिका पर शीर्ष अदालत के 13 मई, 2022 के आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी। समीक्षा याचिका को बाद में पिछले साल दिसंबर में खारिज कर दिया गया था।
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