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ताजमहल के दौरे पर योगी आदित्यनाथ, दीदार काफी नहीं, उसे देखने के लिए मोहब्बत भरी नजर चाहिए

ताजमहल पर विपक्ष और सत्तापक्ष के आरोप और प्रत्यारोप के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ताजमहल के दौरे पर पहुंचे हैं।

नई दिल्ली। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज आगरा में ताजमहल का दौरा कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ताजमहल सियासत का एक नया मुद्दा बन गया था, जब यूपी सरकार की पर्यटन सूची से ताजमहल का नाम हटा दिया गया था हालांकि सरकार ने इससे इनकार किया था। बाद में इसे उत्तर प्रदेश सरकार के कैलेंडर में जगह दी गई थी। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि ताजमहल भारतीय मजदूरों के खून-पसीने से बना है और उस पर उत्तर प्रदेश को गर्व है।

ताजमहल अद्भुत है, सातवां आश्चर्य है, आश्चर्यों में आश्चर्य है- ये दुनिया जानती है। लेकिन, ये क्यों अद्भुत है इसे समझने की कोशिश मुमताज महल की मौत के तकरीबन 400 साल बाद भी होती दिख रही है जिनके अशेष अवशेष यहां की कब्र में जमींदोज हैं। ताजमहल का सौन्दर्य यहां अजर-अमर मोहब्बत की आत्मा के वास करने के कारण है या कि इसके लुटते सौन्दर्य के पीछे वजह यहां गुनाहों के देवताओं का वास है- इस पर 'सौन्दर्यप्रेमी' झगड़ रहे हैं।

taj mahal

चलिए ‘गद्दारों का स्मारक’ कहा, गद्दारी का नहीं

चलिए ‘गद्दारों का स्मारक’ कहा, गद्दारी का नहीं

सौन्दर्यप्रेमी झगड़ते भी हैं! उनका मनमस्तिष्क तो कोमल होता है। आकर्षक होता है। ये बीजेपी सांसद संगीत सोम की ताजमहल के लिए चाहत ही है कि उन्होंने इसे ‘गद्दारों का स्मारक' बताया है। चलिए, ‘गद्दारी का स्मारक' नहीं कहा है- संतोष की बात है। संगीत सोम को वैसे ये बात याद दिलायी जा सकती है कि राजघाट को भी शांति, अहिंसा, सच्चाई, विनम्रता का स्मारक मानता आया है देश क्योंकि वहां महात्मा गांधी की अस्थियों के हैं अवशेष। अगर, उनके हत्यारे के नाम से इसे जाना जाता, तो वह ‘गद्दारी का स्मारक' ही कहलाता।

ताजमहल को ज़िन्दा नहीं रख सकती थी क्रूरता

मौत से पहले अपने ही बेटे औरंगजेब के हाथों बेड़ियां पहनकर शाहजहां ने जेल में ही अंतिम सांसें लीं। ताजमहल के नीचे मोहब्बत और क्रूरता दोनों बसी हैं। मगर, ताजमहल को औरंगजेब की क्रूरता न बना सकती थी, न ज़िन्दा रख सकती थी। लिहाज़ा इसे कभी ‘क्रूरता की इमारत' के रूप में याद नहीं किया गया। यह शाहजहां और मुमताज की मोहब्बत के रूप जिन्दा है जो बाद की पीढ़ियों में भी असंख्य मोहब्बतों का गर्भगृह बनता रहा है।

सियासत में ‘ताज’ पर उबाल

सियासत में ‘ताज’ पर उबाल

मगर, बीजेपी नेता संगीत सोम के बयान के बाद देश की राजनीति में उबाल आ गया है मानो संगीत सोम के बयान का ही सबको इंतज़ार था। असदुद्दीन ओवैसी जो खुद संकीर्ण धार्मिक सोच से सांप्रदायिकता फैलाने को बेताब रहते हैं, उन्होंने गर्व के साथ ललकारा है। पीएम मोदी लालकिले से झंडा फहराना बंद कर दें क्योंकि उसे भी उन्हीं ‘गद्दारों' ने बनाया है, विदेशी अतिथियों से हैदराबाद हाऊस में मिलना बंद कर दें पीएम क्योंकि इसके निर्माता भी वही गद्दार हैं.. वगैरह-वगैरह। तलवार से ढाल टकरा रही है, लेकिन तलवार से तलवार टकराने के मौके भी तलाशे जा रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने रिजेक्ट की संगीत सोम की थ्योरी

सुकुन की बात ये है कि यूपी के शहंशाह योगी आदित्यनाथ ने संगीत सोम के गद्दार वाली थ्योरी को रिजेक्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि ताजमहल हिन्दुस्तान के मजदूरों के ख़ून-पसीने से बना है और यह दुनिया के लिए बड़ा पर्यटन स्थल है। वैसे, योगी की इस थ्योरी में भी संगीत सोम की थ्योरी का एक हिस्सा छिपा है। योगी ताजमहल को ‘मोहब्बत का स्मारक' जैसी चीज मानने को तैयार नहीं दिखते। वे पर्यटन स्थल के रूप में ताजमहल को देख रहे हैं। हालांकि सच ये भी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार ताजमहल को किसी ‘मंदिर को तोड़कर बनाया गया' बोलने से भी बच रहे हैं। शायद जिम्मेदारी ने उन्हें असदुद्दीन ओवैसी बनने से रोक रखा है।

आखिर है क्या ताजमहल?

आखिर है क्या ताजमहल?

ताजमहल क्या है? तकरीबन 400 साल बाद भी हम यही जानने की कोशिश कर रहे हैं! ये मकबरा है या मोहब्बत का स्मारक, स्थापत्य का बेजोड़ नमूना है या पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र, अद्भुत कला और सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति है यह इमारत या कि आश्चर्यों में आश्चर्य...या फिर ये है गद्दारों की निशानी अथवा भारतीयों के ख़ून-पसीने से गढ़ी गयी अद्भुत इमारत?

‘आश्चर्यों में आश्चर्य' है ताज

ताजमहल के नीचे क्या है? अशेष अस्थियां मुमताज महल की, जिनकी याद में शाहजहां ने दुनिया भर के आश्चर्यों को इकट्ठा किया- ‘आश्चर्यों में आश्चर्य' पैदा किया। 20 हज़ार मज़दूर, देश-विदेश के नामचीन कलाकार, वास्तुकार, नग-नगीने, पत्थर-रत्न, इंसान ही नहीं हाथी-घोड़ों का सतत परिश्रम- इन सबने मिलकर जो सफेद कब्र गढ़ा, वही कब्र खुद इसके निर्माता और मुमताज के मजनूं शाहजहां का भी कब्रगाह हो गया।

वो ताज अब कहां जिसे शाहजहां ने बनवाया

वो ताज अब कहां जिसे शाहजहां ने बनवाया

कहते हैं ताजमहल को पर्यावरण ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। आज वो ताजमहल उस रूप में ज़िन्दा नहीं है जिसे शाहजहां ने बनवाया था। कभी अंग्रेजों ने इसे बर्बाद किया, तो कभी पर्यावरण को हुए नुकसान ने। ताजमहल के नाम से घोटाले भी चर्चित हुए और अब विवाद भी एक के बाद एक पैदा हो रहे हैं। नेताओं में भी ताजमहल के बहाने खुद को चर्चित बनाने की होड़ है।

इतिहास और विरासत पर गर्व करना जरूरी- मोदी

हमेशा की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुप हैं। ऐसा नहीं है कि वे नहीं बोलेंगे। वे बोलेंगे, लेकिन तब नहीं जब विपक्ष उनसे सुनना चाहेगा। वे तब बोलेंगे जब वे दूसरों को सुनाना चाहेंगे। दरअसल प्रधानमंत्री ‘मन की बात' कहने का समय खुद तय करते हैं। वैसे बिना ताजमहल का नाम लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुर्वेद संस्थान की आधारशिला रखते हुए अनोखी बातें कही हैं। पीएम मोदी ने कहा है, "जो देश अपने इतिहास और विरासत पर गर्व नहीं करता, वह आगे नहीं बढ़ सकता।"

काश! मोदी की बात 1992 में भी रहती याद

काश! मोदी की बात 1992 में भी रहती याद

वाह! क्या बात कही है! संगीत सोम सुन लें- ताजमहल पर गर्व नहीं करेंगे और उसे ‘गद्दारों की विरासत' बताएंगे तो देश आगे नहीं बढ़ सकता। अब पता नहीं ये बात बीजेपी नेता नरेन्द्र मोदी बोल रहे हैं या देश के प्रधानमंत्री, क्योंकि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए तो कांग्रेसी नरसिंहाराव भी यही कहते रह गये थे और यूपी में कल्याण सिंह की बीजपी सरकार ने विवादास्पद बाबरी ढांचा गिरवा दिया था। इतिहास और विरासत धराशायी कर दिया गया था। वैसे इस बार यूपी और केन्द्र दोनों जगहों पर बीजेपी की सरकार है इसलिए किसी अनहोनी का ख़तरा नहीं है। वरना ‘गद्दारों का स्मारक' जिस ताजमहल को बताया जा रहा है उसे बर्दाश्त क्यों किया जाता? सीएम योगी कह रहे हैं, "ये महत्व नहीं रखता कि इसका किसने और किन कारणों से निर्माण कराया। यह भारतीय मजदूरों के ख़ून और पसीने से बनाया गया है।"

टैगोर की नज़र से ताजमहल का करें दीदार

चाहे मोदी हों या योगी, संगीत सोम हों या असदुद्दीन ओवैसी इन्हें ताजमहल को न सिर्फ खुली आंखों से देखना होगा बल्कि अंतर की आत्मा से देखना होगा। अगर आत्मा से देखने की क्षमता नहीं हो, तो वे गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर की नज़र से ताजमहल को देख सकते हैं। टैगोर ने कहा था, "आप शाहजहां के जीवन, उनकी जवानी, उनका धन और उनकी महिमा जानते हैं। सबकुछ समय की धार में बह गया। इसलिए क्या आप अपने दिल को दुखाते रहेंगे? हीरा, मोती और माणिक की महिमा को नष्ट होने दो। केवल इस आंसू की बूंद, ताजमहल, को रहने दो, जो समय के गाल पर बेदाग होकर हमेशा-हमेशा चमकता रहेगा।"

नज़र और नज़रिए से ही ज़िन्दा रहेगा ताजमहल

नज़र और नज़रिए से ही ज़िन्दा रहेगा ताजमहल

टैगोर ने ताजमहल को जिस नजरिए से देखा था, उसे बरकरार रखकर ही ताजमहल को ज़िन्दा रखा जा सकता है। दुनिया के पर्यटक महज अद्भुत इमारत देखने नहीं आते। अपनी मोहब्बत को उस बेमिसाल मोहब्बत के पैगाम से सराबोर करते हुए यादें संजोने आते हैं। ताजमहल महज मोहब्बत का मंदिर नहीं है, इसमें भारतवर्ष की कला है, स्थापत्य है, श्रम है और इन सबसे उपजा सौन्दर्य है। यही सौन्दर्य इसकी ज़िन्दगी है जिससे जुड़ने आते हैं लोग। जीवन का ये संगीत कोई सोम नहीं समझ सकता। बहुत लोकप्रिय गीत है- ये मेरा घर, ये तेरा घर किसी मांगना हो गर, तो मांग ले मेरी नज़र, तेरी नज़र। ताजमहल का दीदार ही काफी नहीं है उसे समझने के लिए, ताज को समझना है तो मोहब्बत की नज़र पैदा करना होगी जो मुमताज और शाहजहां में एक-दूसरे की आंखों में थी।

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