शोपियां फायरिंग केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा 24 अप्रैल से पहले मेजर आदित्य के खिलाफ नहीं होगी कोई कार्रवाई
शोपियां फायरिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नया आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस केस में मेजर आदित्य के खिलाफ उसकी अगली सुनवाई से पहले कोई कार्रवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल की तारीख अगली सुनवाई के लिए तय की है।
नई दिल्ली। शोपियां फायरिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नया आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस केस में मेजर आदित्य के खिलाफ उसकी अगली सुनवाई से पहले कोई कार्रवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल की तारीख अगली सुनवाई के लिए तय की है। इसका मतलब है कि इस तारीख से पहले कोई भी कार्रवाई मेजर आदित्य के खिलाफ नहीं की जा सकेगी। वहीं जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है उसमें सरकार यू-टर्न लेती नजर आ रही है। सरकार की ओर से कहा गया है कि एफआईआर में मेजर आदित्य का नाम नहीं है। इस रिपोर्ट को उस समय सरकार की ओर से पेश किया गया जब जम्मू कश्मीर पुलिस की एफआई को चैलेंज करने वाली एक याचिका कोर्ट में दायर की गई थी।

सरकार ने लिया यू-टर्न
जम्मू कश्मीर सरकार की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मेजर आदित्य के खिलाफ किसी तरह के कोई भी आरोप नहीं है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर कहा है कि भले मेजर आदित्य का नाम एफआईआर में न हो लेकिन उनका जिक्र है और ऐसे में किसी भी पल जांच में उनका नाम आ सकता है। कोर्ट ने इसके साथ ही जांच पर भी स्टे लगा दिया है। कोर्ट ने जम्मू कश्मीर पुलिस को दो हफ्ते का समय दिया है और पुलिस को इतने समय में मेजर आदित्य के पिता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह की की ओर दायर याचिका का जवाब देना होगा। शोपियां में जनवरी में सेना की ओर से फायरिंग में तीन नागरिकों की मौत हो गई थी और इस केस में जम्मू कश्मीर पुलिस ने 10 गढ़वाल के मेजर आदित्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। ले.कर्नल सिंह की याचिका में कहा गया है कि 27 जनवरी को हुई इस घटना में फयरिंग करने का मकसद आतंकियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई से भीड़ को दूर रखना था ताकि ज्यादा नुकसान न होने पाए। इस फायरिंग के बाद जो एफआईआर पुलिस की ओर से दर्ज की गई है वह उनके बेटे के मौलिक अधिकारों का हनन करने वाली है।
क्या थी पूरी घटना
शोपियां के गान्वपोरा गांव में पत्थरबाजी करने वाली भीड़ पर सेना को गोलियां चलानी पड़ गई थीं। इस फायरिंग में जहां दो व्यक्तियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई तो तीसरे व्यक्ति ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हत्या की जांच के आदेश भी दिए थे। इससे पहले फरवरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में मेजर आदित्य की तरफ से इस केस को लड़ रही ऐश्वर्या भाटी ने उस समय कहा था कि जिस तरह से पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है उसके पीछे राजनीतिक मंशा झलकती है। साथ ही एफआईआर यह बताने के लिए भी काफी है कि जम्मू कश्मीर में सेना को किस तरह के हालातों में काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।












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