आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी को झटका, मां ने पार्टी छोड़ी, बेटी की वजह से फैसला
हैदराबाद, 8 जुलाई: आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की मां और पार्टी की मानद अध्यक्ष वाईएस विजयलक्ष्मी ने अपना पद छोड़ दिया है और पार्टी छोड़ने का भी ऐलान किया है। वह विजयम्मा के नाम से ज्यादा लोकप्रिय हैं। जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी के लिए इसे बड़ा झटका इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी के ही बड़े कार्यक्रम में विजयम्मा ने अपने फैसले की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वो तेलंगाना में अपनी बेटी वाईएस शर्मिला के राजनीतिक अभियान में उनका साथ देंगी। गौरतलब है कि शर्मिला की पार्टी और उनके भाई की पार्टी में तालमेल नहीं है।

जगन मोहन रेड्डी की मां ने छोड़ी पार्टी
विजयम्मा ने अपने फैसले की घोषणा गुरुवार को वाईएसआर कांग्रेस के पूर्ण अधिवेशन पर अपने भाषण के अंत में की। गुंटूर में आयोजित पार्टी का यह अधिवेशन पांच साल बाद हो रहा है। जिस दौरान उन्होंने अपना पद छोड़ने का ऐलान किया, उनके बेटे और पार्टी अध्यक्ष एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी वहीं पर मौजूद थे। उन्होंने कहा, 'मेरी बेटी वाईएस शर्मिला के साथ मेरे खड़े होने को लेकर बहुत सारी अटकलें, अफवाहें और अनावश्यक विवाद थे, जो तेलंगाना के लोगों के लिए वाईएस राजशेखर रेड्डी के सपनों को साकार करने के लिए वहां अकेली लड़ाई लड़ रही हैं। इसलिए, मैंने परिवार के भीतर मतभेदों के बारे में अनावश्यक विवाद या हितों के टकराव को खत्म करने के लिए वाईएसआरसीपी छोड़ने का फैसला किया है।'

जगन मोहन रेड्डी दोबारा बनेंगे सीएम- विजयम्मा
हालांकि, विजय अम्मा ने कहा कि 'मुझे विश्वास है कि वाईएस जगन यहां दोबारा मुख्यमंत्री चुने जाएंगे। मैं मुश्किल दिनों में अपने बेटे के साथ थी। अब इनका अच्छा समय है। मैं दोषी महसूस करूंगी अगर मैं अपनी बेटी के साथ खड़ी नहीं रही। इसलिए मेरी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मैं मेरे मानद अध्यक्ष का पद छोड़ रही हूं। मैं एक मां के तौर पर अपने बेटे और आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ रहूंगी।'

तेलंगाना-आंध्र प्रदेश के बीच उलझा जगन का परिवार
उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात को समझती हैं जल-बंटवारा विवाद समेत विभाजन से जुड़े मुद्दों पर दो अलग-अलग राज्यों के लोगों को ध्यान में रखते हुए, दोनों दलों का स्टैंड अलग होगा। इसलिए, मेरे लिए यह सही नहीं रहेगा कि मैं दोनों दलों के साथ रहूं। दअरसल, दोनों दलों ने शुरू से ही दूरी बनाकर रखी है। यहां तक कि जब वाईएस शर्मिला ने अपनी पार्टी वाईएसआईर तेलंगाना पार्टी लॉन्च भी नहीं की थी, तेलंगाना में राजनीतिक पार्टी बनाने के उनके इरादे को समझकर वाईएसआरसीपी ने बयान जारी कर साफ किया था कि पार्टी या जगन मोहन रेड्डी का उससे कोई लेना-देना नहीं है।
करीब साल भर चले आंदोलन के बाद 2014 में केंद्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल में आंध्र प्रदेश राज्य का विभाजन हुआ था और नए राज्य तेलंगाना का गठन हुआ था। उसी के बाद से कई मुद्दों पर दोनों राज्यों में तल्खी भी देखी जाती है।












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