शिवराज के सामने मोदी-आडवाणी में सामंजस्य बिठाने की चुनौती

भोपाल| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से 25 सितंबर की तारीख काफी अहम होने वाली है। इस दिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पार्टी के कार्यकर्ता महाकुंभ में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तथा पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी एक साथ हिस्सा लेने वाले हैं। इस आयोजन में दोनों के बीच सामंजस्य बिठाना मुख्ममंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहने वाला है।

भाजपा में इन दिनों मोदी-आडवाणी के रिश्ते ठीक नहीं हैं। बीते दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम इस बात के प्रमाण हैं। आडवाणी ने पहले मोदी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध किया और फिर उनको (मोदी) भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की पहल में भी साथ नहीं दिया। अलबत्ता उन्होंने अपनी 'व्यथा' का इजहार पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर किया। यह बात अलग है कि आडवाणी ने छत्तीसगढ़ की एक सभा में मोदी के शासन की तारीफ की।

Shivraj Singh

आडवाणी और मोदी आपसी मनमुटाव के बाद अभी तक संयुक्त रूप से पार्टी के किसी बड़े कार्यक्रम में एक साथ नजर नहीं आए हैं। हां, वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित समारोह में दोनों की मुलाकात जरूर हुई थी। मगर उस मौके पर भी रिश्तों में अपनापन कम ही नजर आया था। अब 25 सितंबर को भोपाल में होने जा रहे भाजपा के कार्यकर्ता महाकुंभ में दोनों का आमना-सामना होने की संभावना है।

इस आयोजन के दौरान मोदी-आडवाणी का क्या रुख रहेगा, और किस तरह दोनों एक-दूसरे से मुखातिब होंगे, इस पर सबकी न केवल नजर रहेगी बल्कि अभी से इसको लेकर जिज्ञासा भी है।

भोपाल के कार्यकर्ता महाकुंभ में मोदी-आडवाणी की मौजूदगी के बीच उनमें सामंजस्य स्थापित करना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए चुनौती भरा कार्य रहने वाला है। इसकी वजह भी है, क्योंकि चौहान की गिनती आडवाणी समर्थक के तौर पर होती है, और आडवाणी भी चौहान की सराहना में कभी पीछे नहीं रहते।

जानकार मानते हैं कि शिवराज नहीं चाहते कि यह आयोजन एकल होकर रह जाए, सफलता का श्रेय सिर्फ मोदी के खाते में न चला जाए, इसीलिए आडवाणी को भी पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है। मंच पर मोदी हावी न रहें, भीड़ में सिर्फ उन्हीं के जयकारे न लगें और राज्य में कोई नया संदेश न चला जाए, इसे आंकने में भी आडवाणी उनके मददगार बनेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटैरिया का मानना है कि इस आयोजन में मोदी के साथ आडवाणी को लाकर शिवराज समन्वय व संतुलन की राजनीति करना चाह रहे हैं। भविष्य में राजनीति की दिशा क्या होगी, इसे कोई नहीं जानता, लिहाजा शिवराज कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे संभावनाएं प्रभावित हों।

कार्यकर्ता महाकुंभ जितना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही शिवराज के लिए भी है, क्योंकि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में मोदी से दूर रहना उनके लिए फायदे का सौदा नहीं होगा। अब देखना होगा कि चौहान किस तरह आडवाणी के साथ मोदी को संतुष्ट करने में कामयाब होते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+