Shivraj Patil Net Worth: कितनी संपत्ति छोड़ गए शिवराज पाटिल? पूर्व गृह मंत्री से लेकर संभाली कई जिम्मेदारी
Shivraj Patil Net Worth: देश की राजनीति में कभी शांत स्वभाव, अनुशासन और संवैधानिक पदों की गहरी समझ के लिए पहचाने जाने वाले शिवराज वी पाटिल अब इस दुनिया में नहीं रहे। 90 वर्ष की उम्र में उनका जाना उस युग का अंत है, जिसने महाराष्ट्र की विधानसभा से लेकर देश की लोकसभा तक कई ऐतिहासिक बदलावों को करीब से देखा। एक ऐसे नेता, जिन्होंने अपने सादगी भरे व्यक्तित्व के साथ संसद की कार्यशैली में तकनीक का परिचय कराया।
उच्च पदों पर रहते हुए भी मर्यादा की मिसाल बने रहे और गृह मंत्री के रूप में सबसे कठिन दौरों का सामना किया। आज जब उनके लंबे करियर को पीछे मुड़कर देखते हैं तो साफ दिखता है कि भारतीय राजनीति में ऐसी संतुलित और अनुभवी आवाजें बहुत कम ही देखने को मिलती हैं।

विधानसभा से लोकसभा तक का सफर
शिवराज वी पाटिल ने राजनीतिक करियर की शुरुआत महाराष्ट्र विधानसभा से की। वे 1972 और 1978 में दो बार विधायक बने। इसी दौरान वे 1978-79 में महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर भी रहे। इसके बाद 1980 में वे पहली बार लातूर से लोकसभा के लिए चुने गए और लगातार सात बार इस सीट से जीत दर्ज की। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम किया। इनमें शामिल रहे,
- रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
- वाणिज्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार
- विज्ञान और तकनीक, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष और समुद्र विकास मंत्रालयों में राज्य मंत्री
- नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय
- कार्मिक और रक्षा उत्पादन विभाग
इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने तकनीक, उद्योग और अंतरिक्ष से जुड़े कई नीतिगत सुधारों में भूमिका निभाई।
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लोकसभा अध्यक्ष के रूप में काम
1991 से 1996 तक वे 10वीं लोकसभा के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने संसद में कई महत्त्वपूर्ण सुधार शुरू किए, जिनका असर लंबे समय तक दिखा।
- संसद के रिकॉर्ड का कम्प्यूटरीकरण
- लोकसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू कराना
- संसद पुस्तकालय भवन के निर्माण की पहल
- उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार की शुरुआत
लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल अनुशासन, शांत स्वभाव और प्रक्रियागत सुधारों के लिए जाना जाता है।
गृह मंत्री के रूप में चुनौतीपूर्ण समय
सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी आलोचना। 2004 में वे राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचे और मनमोहन सिंह सरकार में गृह मंत्री बने। उनका यह कार्यकाल कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से भरा रहा। खास तौर पर:
- 2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट
- देश में बढ़ते आतंकी हमले
- 26/11 मुंबई हमला
26/11 के बाद सुरक्षा इंतजामों और मंत्रालय के प्रबंधन को लेकर उनकी कड़ी आलोचना हुई। मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 30 नवम्बर 2008 को इस्तीफा दे दिया।
राज्यपाल के रूप में सेवा
2010 में उन्हें पंजाब का राज्यपाल और चंडीगढ़ का प्रशासक नियुक्त किया गया। उन्होंने 2015 तक इस पद पर रहते हुए प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाने और राज्यपाल कार्यालय की गतिविधियों को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए। कानून की पढ़ाई कर चुके पाटिल ने राजनीति, प्रशासन और आध्यात्म पर कई किताबें लिखीं। उनकी किताबें Reminiscences and Reflections और Ecstasy and Agony of a Presiding Officer संसदीय कार्यप्रणाली और व्यक्तिगत अनुभवों का दस्तावेज मानी जाती हैं।
विवादों में भी रहा नाम
गृह मंत्री रहते हुए उन पर आपत्तियों और आलोचनाओं का दौर भी चला। 26/11 हमले और 2005 दिल्ली ब्लास्ट जैसी घटनाओं के दौरान कथित तौर पर कई बार कपड़े बदलने को लेकर वे विपक्ष और मीडिया के निशाने पर रहे। इसे लेकर उन पर समय की गंभीरता को न समझने का आरोप लगा।
कितनी संपत्ति के मालिक थे शिवराज पाटिल
पाटिल की कुल संपत्ति का सबसे ताजा आधिकारिक दस्तावेज उनका 2009 का चुनाव हलफनामा है, जिसमें उनकी संपत्ति लगभग 4.01 करोड़ रुपये दर्ज थी। इसके बाद उन्होंने कोई लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, इसलिए उनकी नवीनतम संपत्ति का सटीक सार्वजनिक ब्योरा उपलब्ध नहीं है। उनकी चल संपत्ति लगभग ₹51.77 लाख थी, जिसमें बैंक जमा, नकदी और वाहन शामिल थे।
वहीं अचल संपत्ति का मूल्य लगभग ₹3.50 करोड़ था, जिसमें महाराष्ट्र के लातूर में स्थित कृषि भूमि और आवासीय भवन आते थे। हलफनामे में यह भी उल्लेख था कि उस समय उनके ऊपर किसी प्रकार की देनदारी नहीं थी, यानी उनकी देनदारियां शून्य थीं।
शिवराज वी पाटिल का राजनीतिक जीवन कई अहम पड़ावों, उपलब्धियों और चुनौतियों से भरा रहा। वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे जिन्होंने राज्य, संसद और केंद्र सरकार - तीनों स्तरों पर प्रभावी भूमिका निभाई। उनका निधन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।
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