पहाड़ियों की रानी और पानी की किल्लत
शिमला। कभी पहाड़ों की रानी के नाम से चर्चित रहा शिमला अब पानी की कमी, अव्यवस्थित यातायात और बेतरतीब निर्माण से त्रस्त है। शहर में वाहन चलाना किसी दु:स्वप्न तथा आपके धैर्य की परीक्षा लेने जैसा है। हालांकि, सुखद मौसम इसका मुख्य आकर्षण बना हुआ है। चंडीगढ़ स्थित अंग्रेजी दैनिक के पत्रकार तथा शिमला में पले-बढ़े उमेश घरेरा ने इस पहाड़ी इलाके की समस्याओं के बारे में बात की। अपने परिवार के साथ यहां छुट्टियां बिताने आए घरेरा कहते हैं कि शिमला में सबसे बड़ा मुद्दा पार्किंग का सीमित स्थान है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिमला में गर्मी तथा सर्दी दोनों मौसम में पानी की कमी रहती है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया रपट ने शिमला नगर निगम की कमियों को दिखाया है, जिसमें कहा गया है कि शहर को 24 घंटों में सिर्फ 1.2 घंटे ही पानी उपलब्ध होता है। इसके मुताबिक, पानी की आपूर्ति प्रति व्यक्ति आवश्यकता के 135 लीटर से काफी कम होती है। 2009-14 के बीच नगरनिगम ने प्रति दिन प्रति व्यक्ति 110 लीटर पानी की आपूर्ति की थी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शहर में पानी की मांग प्रतिदिन चार करोड़ लीटर है, लेकिन सिर्फ 3.5 से 3.7 करोड़ लीटर पानी ही उपलब्ध हो पाता है। मीडिया की रपटों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने राज्य सरकार को इस पर स्थिति रपट पेश करने तथा पानी की आपूर्ति का वास्तविक आंकड़ा पेश करने को कहा था। रपट में सरकार की तरफ से जल संसाधन को चिन्ह्ति करने के लिए उठाए गए कदम की भी सूचना मांगी गई है।
न्यायालय में जहां मामले की सुनवाई 29 जून को होनी है, वहीं रपट में कहा गया है कि सरकार और नगरनिगम जल की कमी की समस्या को दूर करने में विफल रहे हैं, जो कि साल भर एक आम समस्या रही है।
सिंचाई तथा लोक स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स कहती हैं कि शिमला के लोगों को जल की आपूर्ति हमारी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता रही है। स्टोक्स ने बताया कि शिमला को कोल डैम से जल आपूर्ति करने, पानी वितरण व्यवस्था को ठीक करने और नालियों को दुरुस्त करने संबंधी विस्तृत रपट को केंद्र सरकार ने तकनीकी मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं में 643 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। (IANS)












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