शीला दीक्षित ने बताया, क्यों कांग्रेस आप के खिलाफ हारी, अपनी हार की भी वजह बताई
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से दिल्ली का चुनाव जबरदस्त बहुमत से जीता है, उसके बारे में आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने खुलकर अपनी राय रखी है। शीला दीक्षित ने अपनी आत्मकथा में दिल्ली में कांग्रेस की हार की वजह का जिक्र करते हुए लिखा है कि दरअसल दिल्ली के वो युवा वोटर जिन्होंने पहली बार चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया और अपना मतदान दिया, उन्होंने दिल्ली के विकास, निर्माण को यूं ही ले लिया था, उन्होंने इसकी कद्र को नहीं समझा, जिसके चलते आम आदमी पार्टी को यहां बहुमत मिला और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

27 को रीलीज होगी किताब
शीला दीक्षित ने लिखा कि युवा मतदाता दिल्ली में कांग्रेस के विकास कामों को समझ नहीं सका कि आखिर कैसे हमारी सरकार ने पूरी दिल्ली को बदलकर रख दिया, उन्हें यह पता नहीं था कि हमारी सरकार से पहले दिल्ली का क्या हाल था। शीला ने अपनी किताब सिटिजेन दिल्ली, माई टाइम, माई लाइफ में इन तमाम बातों का खुलकर जिक्र किया है, इस किताब को जयपुर के लिटरेचर फेस्टिवल में 27 जनवरी को रीलीज किया जाएगा।

युवाओं को दिल्ली का विकास नहीं समझ आया
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है कि बड़ी संख्या में दिल्ली के युवा मतदाताओं ने पहली बार अपना वोट दिया था, उन्होंने पिछले 15 सालों में दिल्ली के विकास को नहीं देखा, उनके लिए दिल्ली में हमेशा बिजली आना, फ्लाइओवर, मेट्रो ट्रेन, नए विश्वविद्यालय एक साधारण बात थी, उन्हें ऐसा लगता था कि ये तो सामान्य बात है, उन लोगों ने इन तमाम कामों की अहमियत को नहीं समझा और इसे फॉर ग्रांटेड ले लिया। इसके अलावा शीला दीक्षित ने अपनी किताब में आम आदमी पार्टी की राजनीति के बारे में लिखा है।

खुद की हार का भी किया जिक्र
केजरीवाल की दिल्ली की राजनीति के बारे में शीला दीक्षित ने लिखा है कि कांग्रेस ने आप की राजनीति को गंभीरता से नहीं लिया, कांग्रेस इस बात को नहीं समझ सकी कि कैसे केजरीवाल लोगों की भावनाओं को अपनी ओर मोड़कर उन्हें अपनना मतदाता बना रहे हैं। मैं खुद 25000 से अधिक वोटों से हार गई, मैं नई दिल्ली सीट को अरविंद केजरीवाल के खिलाफ हार गई, हमारी पार्टी ने आप को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि शीला दीक्षित ने 2010 में कॉमनवेल्थ घोटाले का खास जिक्र नहीं किया है।

देना चाहती थीं इस्तीफा
शीला दीक्षित ने लिखा है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री के पद का कार्यकाल पूरा होने से पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहती थीं, लेकिन 16 दिसंबर को गैंगरेप की घटना के बाद मैंने सत्ता में बने रहने का फैसला लिया और इस मामले में आरोपियों को जेल पहुंचाने का फैसला लिया। शीला दीक्षित ने अपनी आत्मकथा लिखने का फैसला उस वक्त लिया जब मार्च-अगस्त 2017 में वह केरल की राज्यपाल थी, उसी दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखनी शुरू की।












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