Shashi Tharoor: कश्मीर पर ट्रंप के मध्यस्थता की कोशिश क्यों एक कूटनीतिक भूल है? थरूर ने गिनाए इसके 4 बड़े कारण

Shashi Tharoor: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी ने भारत में व्यापक असंतोष और राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने ट्रंप की इस मध्यस्थता पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला करार दिया है।

थरूर ने अमेरिकी प्रेसिडेंट के बयान को भारत के लिए 'निराशाजनक' करार देते हुए चार ठोस बिंदुओं में इसका विश्लेषण किया है।

Shashi-Tharoor-news

Shashi Tharoor: थरूर का ट्रंप पर कडा प्रहार

शशि थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को भारत की संप्रभुता, आतंकवाद के प्रति अमेरिकी रुख, कूटनीतिक संतुलन और वैश्विक मंच पर भारत-पाक संबंधों की छवि के लिए खतरनाक बताया।

आइए समझते हैं कि थरूर ने ट्रंप की टिप्पणी को लेकर कौन-कौन से चार मुख्य बिंदु उठाए और वे भारत के लिए क्यों चिंताजनक हैं:

1. पीड़ित और हमलावर को एक समान मानना - झूठी समता का संकेत

शशि थरूर ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि पीड़ित और हमलावार एक समान नहीं माने जा सकते हैं। थरूर ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी से ऐसा प्रतीत होता है जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच समानता का रिश्ता है - जैसे दोनों ही पक्ष किसी विवाद के बराबर हिस्सेदार हैं। थरूर का कहना है कि यह "झूठी समता" उस ऐतिहासिक सच्चाई को नकारती है जिसमें पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियाँ और भारत पर सीमापार हमलों की भूमिका अच्छी तरह से दस्तावेज़ीकृत है।

थरूर ने न्यूज एक्स को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि यह कहना कि दोनों पक्षों को बातचीत करनी चाहिए, दरअसल आतंकवाद के शिकार और आतंक फैलाने वाले को एक तराजू में तौलना है। अमेरिका ने अतीत में पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों की निंदा की थी - ट्रंप की यह टिप्पणी उस नीति से विपरीत है।

2. पाकिस्तान के साथ बातचीत स्वीकार्य नहीं

थरूर का दूसरा बड़ा तर्क यह है कि ट्रंप के बयान ने पाकिस्तान को बातचीत की वह वैधता प्रदान कर दी है, जिसे वह बिल्कुल भी डिजर्व नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान आतंक का सहारा लेता रहेगा, भारत उसके साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत कभी भी बंदूक की नोक पर बातचीत नहीं करेगा। जब पाकिस्तान खुद आतंकवाद का पोषक बना हुआ है, तब उसे बातचीत के लिए वैधता देना, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करना है - जो बिल्कुल अस्वीकार्य है।"

3. कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण - आतंकवादियों की योजना को बढ़ावा

थरूर ने जो तीसरा मुद्दा उठाया, वह है कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना जो भारत के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। भारत हमेशा यह स्पष्ट करता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही होगा।

ट्रंप द्वारा मध्यस्थता की पेशकश को थरूर ने सीधे तौर पर आतंकवादी एजेंडों को बढ़ावा देने वाला बताया। उन्होंने कहा, "यह वही चाहते हैं जो आतंकवादी भी चाहते हैं - कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया जाए। भारत ने कभी किसी तीसरे देश से मध्यस्थता की मांग नहीं की है, न ही भविष्य में करेगा।"

4. भारत और पाकिस्तान को फिर से जोड़ना (Re-hyphenation)

थरूर ने अपने चौथे और अंतिम बिंदु में ट्रंप की टिप्पणी को "भारत और पाकिस्तान को फिर से एक ही श्रेणी में देखने की प्रवृत्ति" करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले दो दशकों में अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियाँ भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग कूटनीतिक संदर्भों में देखने लगी थीं। अमेरिका के राष्ट्रपति क्लिंटन के समय से यह परंपरा रही है कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति भारत की यात्रा के साथ-साथ पाकिस्तान की यात्रा को नहीं जोड़ता।

थरूर ने कहा, "यह ट्रंप की टिप्पणी उस प्रगति को पलट देती है। एक समय था जब अमेरिका और दुनिया के अन्य नेता भारत और पाकिस्तान को एक ही फ्रेम में देखने से बचते थे। ट्रंप की यह कोशिश उस पुराने 'हाइफ़नेशन' युग की वापसी है - जो भारत के वैश्विक रुतबे के लिए हानिकारक है।"

India Pakistan Tension: ट्रंप ने कहा क्या था जिससे शुरू हुआ विवाद?

दरअसल, यह पूरा विवाद डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि यदि दोनों पक्ष चाहें तो अमेरिका समाधान में मदद कर सकता है। जबकि भारत की नीति स्पष्ट रही है - कश्मीर उसका आंतरिक विषय है और भारत-पाक संबंधों में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं हो सकती।

शशि थरूर का यह विश्लेषण सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति, कूटनीतिक प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर गहराई से आधारित है। ट्रंप की टिप्पणी को लेकर भारत की असहमति केवल राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि सैद्धांतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी है।

भारत कई दशकों से यह कोशिश करता रहा है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी आतंकि गतिविधियों के लिए किसी प्रकार की मान्यता न मिले। ऐसे में ट्रंप जैसे वैश्विक नेता का इस तरह का बयान कई स्तरों पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है और यही कारण है कि थरूर की इस चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+