Sharbat Jihad: क्या है रूहअफजा का पाकिस्तान कनेक्शन? क्यों हैं बाबा रामदेव सवालों के घेरे में?

गुरु

Sharbat Jihad: योग गुरु बाबा रामदेव इन दिनों 'शरबत जिहाद' को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना के शिकार हैं। कुछ यूजर्स उन्हें इस बात के लिए जबरदस्त ट्रोल कर रहे हैं। तो वहीं अब इसके लिए बाबा रामदेव को दिल्ली हाईकोर्ट से भी फटकार लगी है।

कोर्ट ने कहा है कि 'बाबा रामदेव का अपराध बिल्कुल भी माफी के लायक नहीं है।' जिसके बाद बाबा रामदेव ने दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया है कि उनके विवादास्पद "शरबत जिहाद" वाले सभी वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए जाएंगे।

Sharbat Jihad

बाबा रामदेव के वीडियो पर मचा बवाल (Sharbat Jihad)

आपको बता दें कि ये सब विवाद बाबा रामदेव के एक वीडियो से पैदा हुआ है। दरअसल उन्होंने अपनी कंपनी पतंजलि के अधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था।

'लाल रंग के शरबत का पैसा मदरसे में लगता है'

जिसमें उन्होंने अपनी कंपनी का एक एनर्जी ड्रिंक की खूबियां बताते हुए लोगों से कहा था कि 'लंबे वक्त से कुछ लोग एक लाल रंग का शरबत पीते आ रहे हैं, जिससे होने वाले मुनाफे से देश मं मदरसे बनते हैं, जबकि उनकी कंपनी से होने वाली इनकम से गुरुकुल खोले जाते हैं।'

सोशल मीडिया पर 'शरबत जिहाद' पर घमासान (Sharbat Jihad)

हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर रूहअफजा (Rooh Afza) का नाम नहीं लिया था लेकिन लोगों ने बाबा के वीडियो को रूहअफजा (Rooh Afza) से जोड़ दिया और इसे 'शरबत जिहाद' नाम दे दिया है और इसी के बाद से रामदेव ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए थे।

क्या है रूहअफजा की कहानी? (Sharbat Jihad)

लेकिन इसी बीच आपको बताते हैं बीते कई दशकों से लोगों के दिलों पर राज करने वाले रूहअफजा (Rooh Afza) की कहानी और जानते हैं इसका पाकिस्तान या मुस्लिमों से क्या लेना-देना है?

यूनानी हकीमों ने बनाया था रूहअफजा

विकिपीडिया के मुताबिक इसे 1906 में दिल्ली के यूनानी हकीमों अब्दुल हमीद और हाफ़िज अब्दुल मजीद, ने मिलकर इसे बनाया था, दोनों का मकसद था कि वो ऐसा टॉनिक तैयार करें जो गर्मियों में शरीर को ठंडक दे और स्वास्थ्यवर्धक भी हो।

'रूह या आत्मा की ताजगी'

उन्होंने यूनानी चिकित्सा पद्धति के आधार पर गुलाब, केवड़ा, तरबूज, नारियल, नींबू, चंदन, पुदीना जैसे जड़ी-बूटियों का उपयोग करके एक बेहतरीन पेय तैयार किया था जिसे नाम दिया था - रूहअफजा, जिसका अर्थ ही है 'रूह या आत्मा की ताजगी'।

बंटवारे के बाद ब्रांड के हो गए दो हिस्से (Sharbat Jihad)

आपको बता दें कि हकीम अब्दुल मजीद की मृत्यु के बाद उनके बेटों ने इस ब्रांड को आगे बढ़ाया लेकिन 1947 में भारत-पाकिस्तान का जब विभाजन हुआ, और यह ब्रांड भी दो हिस्सों में बंट गया।

मोहम्मद सईद ने 'हमदर्द पाकिस्तान' बनाया

ये इंडिया में हमदर्द लैबोरेटरीज (इंडिया) के नाम से जारी रहा, जिसके मालिक हकीम अब्दुल मजीद के छोटे बेटे हकीम अब्दुल हमीद बनें तो वहीं पाकिस्तान में उनके बड़े बेटे हकीम मोहम्मद सईद ने 'हमदर्द पाकिस्तान' की स्थापना की और वो इसके तहत 'रूहअफजा' बेचने लगे।

भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश में बिकता है 'रूहअफजा'

इसके बाद जब बांग्लादेश बना तो वहां भी रूहअफजा बिकने लगा और इस तरह से ये तीन देशों का शीतल पेय पदार्थ हो गया।

रूहअफजा से जुडी हैं भावनाएं

भारत में रूहअफजा केवल एक शीतल पेय नहीं बल्कि बचपन की यादों का सुनहरा हिस्सा है, ये गर्मियों की छुट्टियों और मेहमाननवाजी का अनमोल पार्ट आज भी है। इसका प्रयोग मिल्क शेक, आइसक्रीम, डेज़र्ट, कुल्फी और मिठाइयों में भी धड़ल्ले से होता है।

सालाना कमाई 400-500 करोड़ रुपये के आसपास

हमदर्द लैबोरेट्रीज इंडिया एक गैर-लाभकारी संगठन है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमदर्द इंडिया की सालाना कमाई 400-500 करोड़ रुपये के आसपास है, जिसमें से एक तिहाई से अधिक हिस्सा 'रूहअफजा' से ही आता है।

आज भी गर्मियों की शान है 'रूहअफजा'

वक्त बदला, लोग बदले, मार्केट में सॉफ्ट ड्रिंक की भरमार हो गई लेकिन रूहअफजा का अपना एक सॉलिड मार्कट है, जिस पर बदलते वक्त का कोई असर नहीं दिखता है, ये आज भी गर्मियों की शान है, इसलिए तो कहते हैं- हमदर्द का टॉनिक 'रूहअफजा', जो देता है रूह को सुकून और कराता है आत्मा से मोहब्बत।

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