किसान आंदोलन के भविष्य को लेकर शरद पवार ने कही बड़ी बात, केंद्र सरकार को दी ये सलाह
नई दिल्ली। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि देश में जारी किसान आंदोलन लंबा चल सकता है। साथ ही आने वाले वक्त में इसका दायरा काफी बढ़ सकता है। मामले में केंद्र की ओर से उठाए कदमों को नाकाफी बताते हुए पवार ने कहा कि सरकार किसानों के सब्र की परीक्षा ना लेकर उनसे बात करे, साथ ही कानूनों को वापस लेने पर विचार करे तो बेहतर होगा। पूर्व केंद्रीय कृषिमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने शुक्रवार को मुंबई में मीडिया के साथ बातचीत में ये कहा है।

देशभर में फैलेगा किसान आंदोलन
शरद पवार ने कहा, मुझे जानकारी मिली है कि देशभर से बड़ी संख्या में किसान आज 700 ट्रैक्टरों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं। केंद्र सरकार का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है, इसलिए आने वाले दिनों में आंदोलन के तेज होने और तीव्र होने की संभावना है। अभी ये दिल्ली बॉर्डर तक सीमित है लेकिन अब आंदोलन देश के दूसरे हिस्सों में भी फैलेगा।
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किसानों के सब्र का इम्तिमान ना ले केंद्र
शरद पवार ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों के सब्र का इम्तिहान ना ले। तुरंत उनकी बातों को सुनें और मांगों को माने। उन्होंने कहा, मेरा भारत सरकार से आग्रह है कि किसान देश का अन्नदाता है और उसकी सहिष्णुता का इम्तिहान नहीं लिया जाना चाहिए। साथ ही पवार ने कहा कि विपक्षी दलों ने किसानों से जुड़े इन कानूनों को लेकर विपक्षी दलों ने संसंद में बहस कराने की मांग की थी लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। जल्दीबाजी में इनको पास किया गया। इसी का नतीजा है कि अब किसान सड़कों पर हैं। इससे पहले बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष के नेताओं के साथ शरद पवार ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर और नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की थी।

केंद्र के नए कानूनों के खिलाफ सड़कों पर हैं लाखों किसान
केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से ही आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों को कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। नए कानूनों के खिलाफ ये आंदोलन अभी तक मुख्य रूप से पंजाब में हो रहा था। 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की और कूच किया है और बीते 13 दिन से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर भारी संख्या में किसान बैठे हैं। किसान नेताओं और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत अब तक हो चुकी है। जिसका अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
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