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यौनकर्मियों ने भी बढ़चढ़कर लिया मतदान में हिस्सा, जतायी खुशी

Sex workers elated with voting rights, extremely happy
नई दिल्ली| राष्ट्रीय राजधानी के जी. बी. रोड इलाके में रहने वाली देह व्यापार से जुड़ी यौनकर्मियों ने गुरुवार को बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। नई सरकार चुनने में मतदान का समान अधिकार मिलने से वे बेहद प्रसन्न नजर आईं। चांदनी चौक के अजमेरी गेट इलाके के मतदान केंद्र पर इन महिलाओं ने अपने परिवार और मित्रों के साथ मतदान किया।

चांदनी चौक को बहुत ही अहम सीट माना जा रहा है, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता हर्षवर्धन और आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हुए प्रख्यात पत्रकार आशुतोष के बीच सीधी लड़ाई है।

मतदान के लिए आईं 23 वर्षीया यौनकर्मी पूर्णिमा ने आईएएनएस से कहा, "लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान कर मैं बहुत खुश हूं, और अब मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैं भी भारत की नागरिक हूं।"

पूर्णिमा ने आगे कहा, "आज ऐसा दिन था जब लोगों ने हमसे भेदभाव नहीं किया। दूसरे नागरिकों की ही भांति हम भी एक ही कतार में लगकर अपने मत डालने का इंतजार कर रहे थे।"

यौनकर्मियों के अधिकार के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संगठन भारतीय पतिता उद्धार सभा (बीपीयूएस) के महासचिव इकबाल अहमद के अनुसार, 1,800 यौनकर्मियों के नाम इस बार मतदाता सूची में शामिल किए गए।

जी. बी. रोड की इन बदनाम गलियों में ही अपना जीवन गुजार चुकीं 60 वर्षीय फरीदा का मानना है कि यौनकर्मी ऐसे प्रत्याशी को चुनने में अहम भूमिका अदा कर सकती हैं, जो उनकी समस्याओं का गंभीरता से और बेहतर तरीके से समाधान कर सके।

फरीदा ने कहा, "हम भी इस देश की नागरिक हैं, इसलिए भारत सरकार को हमारे अधिकारों के लिए अवश्य काम करना चाहिए। मैं एक बेहतर सरकार चाहती हूं जो हमारी समस्याओं को दूर कर सके, और इस इलाके में चल रही आपराधिक गतिविधियों पर नजर रख सके।"

उनमें से अधिकतर ने हालांकि शिकायती लहजे में कहा कि वे उनके प्रति समाज के नजरिए को तो नहीं बदल सकते, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सरकार के पास उनके बच्चों के भविष्य और उनकी परिस्थितियों में सुधार करने के बेहतर विकल्प एवं योजनाएं होंगी।

40 वर्षीय नसरीन बेगम ने कहा, "समाज हमें हमेशा नीची नजरों से देखता आया है, क्योंकि हमारे काम को सामाजिक मान्यता नहीं मिली है। हम उनके नजरिए को बदल भी नहीं सकतीं, लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा और नौकरियां मुहैया कराए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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