गंभीर, लंबे समय तक कोरोना से लड़कर बचे लोगों में होती है एंटीबॉडी की सबसे अधिक मात्रा- शोध

रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित हालिया अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 से गंभीर रूप से संक्रमित और लंबे समय तक संक्रमित रहकर ठीक हुए लोगों में बीमारी से लड़ने वाले बेहतर एंटीबॉडी हो सकते हैं।

नई दिल्ली, 21 अगस्त। रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित हालिया अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 से गंभीर रूप से संक्रमित और लंबे समय तक संक्रमित रहकर ठीक हुए लोगों में बीमारी से लड़ने वाले बेहतर एंटीबॉडी हो सकते हैं। रटगर कोरोना विश्वविद्यालय द्वारा महामारी की शुरुआत से 548 स्वास्थ्यकर्मी और 283 अन्य लोगों यह परीक्षण किया गया।

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अध्ययन शुरू होने के 6 महीने के भीतर 831 प्रतिभागियों के नमूने लिए गए, जिनमें से 93 SARS-CoV-2, या एंटीबॉडीज के लिए पॉजीटिव मिले, जोकि सैंपल का 11 प्रतिशत है। इन 93 में 24 गंभीर रूप से कोरोना से संक्रमित थे, जबकि 14 में कोरोना के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। पॉजीटिव सैंपलों में से एक-तिहाई में थकान, सांस लेने में तकलीफ और स्वाद व गंध की कमी जैसे लक्षण थे, जो कम से कम एक महीने तक रहे, जबकि दस प्रतिशत में ऐसे लक्षण थे जो कम-से-कम चार महीने तक चले।

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अध्ययन से पता चलता है कि गंभीर लक्षणों वाले 96% प्रतिभागियों में इम्युनोग्लोबुलिन जी (IgG) एंटीबॉडी पाए गए, जबकि हल्के से मध्यम लक्षणों में यह 89% और बिना लक्षण वाले मरीजों में 79% थे। विश्वविद्यालय के 'द जर्नल ऑफ इंफेक्शियस डिजीज' ने 'विविध जनसंख्या में SARS-CoV-2 संक्रमण के निर्धारक और गतिकी: संभावित कोहोर्ट अध्ययन का 6 महीने का मूल्यांकन' पेपर के तहत यह अध्ययन प्रकाशित किया है।

अध्ययन में शामिल रहे डैनियल बी हॉर्टन ने कहा कि टीकाकरण इम्यून सुरक्षा को बढ़ाता है और कभी-कभी लंबे समय तक चलने वाले लक्षणों को कम करने में मदद करता है। एक अन्य अध्ययनकर्ता एमिली एस बैरेट ने कहा कि एंटीबॉडी के स्तर में समय के साथ गिरावट आना सामान्य है। फिर भी, इम्युनोग्लोबुलिन जी (IgG) एंटीबॉडी शरीर को पुन: संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

इस बीच, सेंट लुइस में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने एक एंटीबॉडी की पहचान की है जो वायरल वेरिएंट की एक बड़ी सीरीज के खिलाफ कम खुराक पर अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करती है। ब्रिटेन की दवा नियामक ने शुक्रवार को कोविड-19 को रोकने और इसके इलाज के लिए मानव निर्मित एंटीबॉडी का उपयोग करके बनाई गई देश की पहली दवा के चिकित्सा उपयोग को मंजूरी दे दी। मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (MHRA) ने कहा कि रोनाप्रेव मानव एंडीबॉडी से निर्मित पहली ऐसी दवा है जो देश में तेजी से फैलते COVID19 संक्रमण की रोकथाम और उपचार में मददगार साबित हो सकती है। इसमें इस तरह के गुण मौजूद हैं।

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