यूपी नहीं गई विकास की रेल,काशी से कानपुर तक निराशा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश से जिस तरह का शानदार समर्थन मिला था, उसके बाद लग रहा था कि मोदी सरकार उत्तर प्रदेश का ख्याल करेगी। भारतीय रेलवे इधर नई-नई गिडियां चलाएगा और बहुत सी परियोजनाएं चालू होंगी जिससे रोजगार सृजित होंगे। पर, अफसोस कि रेल बजट में सबसे अधिक आय देने वाले उत्तर प्रदेश की अनदेखी हुई। इसके चलते काशी से लेकर कानपुर तक निराशा है।
रेल का सफर करने वालों को मालूम है कि यूपी में कई रेलवे स्टेशनों में अभी भी सुविधाओं टोटा है। कहीं स्टेशनों पर बैठने की जगह नहीं है तो कई रेलवे स्टेशनों पर आवश्यकता के अनुसार प्लेटफार्म नहीं हैं। इस बजट में इस तरफ भी कोई खास ध्यान नहीं दिया गया।
विकास की रेल
हालांकि उत्तर प्रदेश को मोदी सरकार के दूसरे रेल बजट से काफी उम्मीदें थीं। गाजियाबाद के पत्रकार रवि अऱोड़ा कहते हैं कि वाराणसी से सांसद चुने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास की रेल काशी तक पहुंचने की उम्मीदें सभी कर रहे थे और आशा थी कि इस बार के रेल बजट में यूपी के लिए काफी कुछ होगा। पर उनकी तरह से प्रदेश के तमाम लोग निराश हैं।
जानकारों का कहना है कि केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर से सांसद हैं और इसके चलते प्रदेश की जनता को काफी अपेक्षाएं थीं। उम्मीद थी कि पूर्वाचल सहित पूरे प्रदेश के लिए इस बार रेल बजट में विशेष उपहार होगा।
योजनाएं अधर में लटकी
रवि अऱोड़ा ने कहा कि पिछले रेल बजट में छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस शुरू करने की बात कही गई थी, जो इस बार भी पूरी नहीं हो पाई। यूपी में रेलवे की कई योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थल के नाम पर कुशीनगर एक्सप्रेस तो चलाई जाती है लेकिन वह गोरखपुर में ही रुक जाती है।













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