Telegram पर बैन, WhatsApp पर नहीं! आखिर ऐसा क्या है इस ऐप में कि सरकार को उठाना पड़ा बड़ा कदम? 5 बड़ी वजह

Telegram Ban Explained: भारत में मेडिकल एंट्रेस एग्जाम NEET (UG) 2026 को लेकर मचे घमासान के बीच मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) को भारत में अस्थाई रूप से ब्लॉक कर दिया है।

यह पाबंदी 21 जून को होने वाली NEET की दोबारा परीक्षा के मद्देनजर लगाई गई है, जो 22 जून 2026 तक जारी रहेगी। इसके साथ ही सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69(A) का इस्तेमाल करते हुए टेलीग्राम के 'मैसेज एडिटिंग' फीचर पर भी 30 जून तक रोक लगा दी है।

Why Telegram is More Dangerous Than WhatsApp Top 5 Reasons Explained

इस बड़े एक्शन के बाद सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक एक ही चर्चा है-आखिर पेपर लीक टेलीग्राम पर हो रहा है, वह व्हाट्सएप (WhatsApp) पर भी तो हो सकता है? आखिर दोनों ही मैसेजिंग ऐप हैं। दोनों पर ग्रुप और मैसेज शेयर किए जाते हैं। फिर Telegram को ही ज्यादा जोखिम वाला क्यों माना गया? ऐसे में आइए जानें 5 बड़ी वजहें, जिसने टेलीग्राम को व्हाट्सएप से कहीं ज्यादा खतरनाक बना दिया है।

▶️Telegram Ban Explained: सरकार ने क्या कार्रवाई की है?

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। यह रोक 22 जून तक लागू रहेगी, ताकि 21 जून को होने वाली NEET री-एग्जाम प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी कराई जा सके।

इसके अलावा टेलीग्राम को भारत में अपने मैसेज एडिट फीचर को भी 30 जून तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। NTA का कहना है कि कुछ मामलों में इस फीचर का इस्तेमाल परीक्षा खत्म होने के बाद फर्जी "पेपर लीक सबूत" तैयार करने के लिए किया गया।

▶️Telegram पर आरोप क्या हैं?

NTA के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में टेलीग्राम पर कई ऐसे चैनल और ग्रुप सक्रिय थे, जो कथित तौर पर NEET री-एग्जाम का पेपर बेचने का दावा कर रहे थे। कुछ चैनलों के नाम ही "PAPER LEAKED NEET", "Re-NEET 2026" और "Private Mafia" जैसे बताए गए।

इन चैनलों पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक मांगे जा रहे थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि अधिकांश दावे फर्जी थे, लेकिन इनसे छात्रों में भ्रम और डर का माहौल बन रहा था। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बिहार, गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर कई चैनल, ग्रुप और बॉट हटाए, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। इसके बाद टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने की सिफारिश की गई।

Telegram Ban in India: टेलीग्राम देशभर में अस्थाई बंद, नहीं कर पाएंगे एक्सेस, सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
Telegram Ban in India: टेलीग्राम देशभर में अस्थाई बंद, नहीं कर पाएंगे एक्सेस, सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?

▶️5 Reasons: WhatsApp से ज्यादा जोखिम वाला क्यों माना जाता है Telegram?

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1️⃣. बिना नंबर दिखाए ग्रुप्स बनाने की आजादी (Extreme Anonymity and Unlimited Channels)

व्हाट्सएप और टेलीग्राम में सबसे बड़ा फर्क पहचान छुपाने और लोगों तक पहुंचने की क्षमता का है। टेलीग्राम पर कोई भी इंसान अपनी पहचान को पूरी तरह गुप्त रख सकता है।

🔷यूजरनेम का खेल: टेलीग्राम पर अकाउंट बनाने के बाद आप अपना मोबाइल नंबर दुनिया से छुपा सकते हैं। लोग आपको सिर्फ एक यूजरनेम से ढूंढ सकते हैं। व्हाट्सएप में अभी यह फीचर सभी के लिए रोलआउट नहीं हुआ है, वहां ग्रुप में शामिल होते ही सबका नंबर दिखने लगता है।

🔷अनलिमिटेड मेंबर्स: टेलीग्राम पर आप ऐसा चैनल बना सकते हैं जिसमें जुड़ने वाले लोगों (Subscribers) की कोई सीमा नहीं होती। एक अज्ञात आदमी चैनल बनाकर लाखों-करोड़ों लोगों तक सीधे पहुंच सकता है। "PAPER LEAKED NEET" और "Private Mafia" जैसे चैनलों ने इसी का फायदा उठाकर लाखों छात्रों को ठगा। व्हाट्सएप के ग्रुप्स में ऐसी असीमित छूट नहीं मिलती, इसमें आप 1023 लोगों को ही एक ग्रुप में जोड़ सकते हैं।

2️⃣. 2GB की भारी-भरकम फाइलें शेयर करने की खुली छूट (Massive File Sharing Support Without Compression)

🔷जालसाजी की दुनिया में टेलीग्राम के पसंदीदा बनने की एक बड़ी वजह इसकी डेटा ट्रांसफर क्षमता है। व्हाट्सएप पर भारी-भरकम फाइलें या बिना कंप्रेस किए बड़े दस्तावेज भेजना आज भी एक सीमा में बंधा है। वहीं टेलीग्राम पर कोई भी यूजर 2GB तक की बड़ी फाइल को बिना किसी क्वालिटी नुकसान के आसानी से शेयर कर सकता है।

🔷इसी फीचर के कारण फिल्मों और वेब सीरीज के पायरेटेड वर्जन टेलीग्राम पर लीक होते हैं। NEET परीक्षा के मामले में भी जालसाजों ने इसी का फायदा उठाया। वे बड़े-बड़े प्रश्नपत्रों के कथित सेट, ढेरों स्टडी मैटेरियल और फर्जी दावों वाली पीडीएफ फाइलें धड़ल्ले से असीमित लोगों को भेज रहे थे, जिससे भ्रम का माहौल बन गया।

3️⃣. टाइमस्टैम्प बदले बिना पुराना मैसेज बदलने की आजादी (Message Editing Feature)

🔷यह टेलीग्राम का एक ऐसा फीचर है जिसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नाक में सबसे ज्यादा दम करके रखा था, और इसी वजह से सरकार को इस फीचर को 30 जून तक के लिए फ्रीज करना पड़ा।

🔷टेलीग्राम पर कोई भी एडमिन अपने पुराने भेजे गए मैसेज को कभी भी एडिट (संशोधित) कर सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि मैसेज बदलने के बाद भी उसका असली 'सेंड टाइम' (भेजने का समय) वही पुराना दिखाता है।

🔷जालसाज इसका इस्तेमाल 'आफ्टर-द-इवेंट' (परीक्षा खत्म होने के बाद) फर्जी सबूत बनाने के लिए करते थे। वे परीक्षा से पहले एक साधारण सा मैसेज डाल देते थे। जब परीक्षा खत्म हो जाती और असली पेपर बाहर आता, तो वे उस पुराने मैसेज को एडिट करके उसमें असली प्रश्नपत्र की पीडीएफ डाल देते थे। इसके बाद वह चैट इंटरनेट पर फैला दी जाती थी कि "देखो, हमारे पास तो पेपर परीक्षा से पहले ही आ गया था।" व्हाट्सएप पर सीमित समय के लिए ही एडिट की अनुमति है और वहां इस तरह फाइलें नहीं बदली जा सकतीं।

4️⃣. सरकारी आदेशों को ठेंगा और ढीली मॉनिटरिंग

टेलीग्राम को बनाने वाले पावेल डुरोव का मूल सिद्धांत ही यही रहा है कि वे बड़ी टेक कंपनियों की तरह सरकारों के दबाव में काम नहीं करेंगे। लेकिन यही रवैया अब भारत में उसके लिए मुसीबत बन गया है।

🔷भारत में ऑफिस न होना: व्हाट्सएप का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी मेटा (Meta) का भारत में बकायदा ऑफिस है और वे भारत के नियमों के तहत काम करते हैं। सरकार जब भी किसी ग्रुप या नंबर को ब्लॉक करने का आदेश देती है, व्हाट्सएप तुरंत एक्शन लेता है। टेलीग्राम का भारत में कोई नोडल ऑफिस या मजबूत लीगल टीम नहीं है, जिससे उनके खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करना टेढ़ी खीर हो जाता है।

🔷AI मॉनिटरिंग की कमी: व्हाट्सएप भले ही एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हो, लेकिन मेटा अपने पब्लिक ग्रुप्स और यूजर बिहेवियर पर नजर रखने के लिए एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल करता है। संदिग्ध गतिविधियों पर व्हाट्सएप खुद अकाउंट ब्लॉक कर देता है। टेलीग्राम के पास ऐसी मॉनिटरिंग या तो बेहद कमजोर है या वे जानबूझकर इस पर ढील देते हैं।

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5️⃣. साइबर अपराधियों और शेल नेटवर्क्स का सुरक्षित ठिकाना

एक रिसर्च (USENIX Security Symposium) के मुताबिक, टेलीग्राम पर महज 339 साइबर क्रिमिनल चैनलों को ही 2.3 करोड़ से ज्यादा लोग फॉलो कर रहे थे। टेलीग्राम पर सामान्य चैट में 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' बाय डिफॉल्ट (अपने आप) लागू नहीं होता, जब तक कि आप 'सीक्रेट चैट' ऑन न करें। इसके बावजूद अपराधी इसे ही चुनते हैं।

चेक पॉइंट की रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में टेलीग्राम ने खुद 4.3 करोड़ से ज्यादा आपत्तिजनक चैनलों को ब्लॉक किया था। साल 2026 में टेलीग्राम ने अपनी कार्रवाई बढ़ाई है और अब वे रोजाना 80 हजार से लेकर 1.4 लाख चैनलों को डिलीट कर रहे हैं।

जालसाज इसका इस्तेमाल शेल कंपनियों की तरह करते हैं। जैसे हाल ही में अहमदाबाद पुलिस ने राजस्थान के दो ऐसे लड़कों को पकड़ा जो टेलीग्राम पर NEET का नकली पेपर बेचने के नाम पर लाखों रुपये ठग रहे थे, जबकि उनके पास कोई पेपर था ही नहीं। व्हाट्सएप पर ऐसे अपराधियों को ट्रैक करना और उनके बैंक अकाउंट तक पहुंचना पुलिस के लिए ज्यादा आसान होता है।

▶️आम यूजर्स के लिए क्या बदला और कब थमेगी ये पाबंदी?

इस सरकारी आदेश के बाद देश के आम टेलीग्राम यूजर्स के मन में कई तरह के सवाल हैं। सरकार ने साफ किया है कि यह हमेशा के लिए लगाया गया प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक सीमित समय का सुरक्षा घेरा है।

  • क्या नया मैसेज भेज सकते हैं?: हां, अगर आपके नेटवर्क प्रोवाइडर (जैसे जियो, एयरटेल, ब्रॉडबैंड) पर ऐप काम कर रहा है, तो आप नए मैसेज भेज सकते हैं। पाबंदी सिर्फ पुराने मैसेज को बदलने पर है।
  • ग्रुप एडमिन पर क्या असर होगा?: अगर आप कोई स्टडी ग्रुप या एजुकेशनल चैनल चलाते हैं, तो आप पुरानी पोस्ट को अपडेट या संशोधित नहीं कर पाएंगे। आपको हर नई जानकारी के लिए एक बिल्कुल नया मैसेज ही टाइप करके पोस्ट करना होगा।
  • यह प्रतिबंध कब खत्म होगा?: टेलीग्राम ऐप पर लगा अस्थाई ब्लॉक री-एग्जामिनेशन के अगले दिन यानी 22 जून 2026 को समाप्त हो जाएगा। वहीं, मैसेज को एडिट न कर पाने का प्रतिबंध 30 जून 2026 तक लागू रहेगा। इसके बाद सेवाएं पहले की तरह सामान्य होने की उम्मीद है, बशर्ते सरकार कोई नया आदेश जारी न करे।
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