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TN Election 2026: सेंथिल बालाजी अब कोयंबटूर दक्षिण से ठोकेंगे ताल, हार का डर या DMK का मास्टरस्ट्रोक?

TN Election 2026: तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले द्रमुक (DMK) ने एक बड़ा राजनीतिक जुआ खेला है। राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी ने अपनी पारंपरिक सीट करूर को छोड़ दिया है और इस बार वे पश्चिमी तमिलनाडु की हाई-प्रोफाइल सीट कोयंबटूर दक्षिण (Coimbatore South) से चुनावी मैदान में उतरेंगे।

DMK के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का 'रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक' मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के आरोपों और सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) से बचने की एक मजबूर कोशिश करार दे रहे हैं।

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Senthil Balaji Coimbatore South Candidate: करूर का 'किंग' अब कोयंबटूर के रण में

सेंथिल बालाजी करूर जिले के एक दिग्गज नेता माने जाते हैं। वे पांच बार के विधायक हैं, जिनमें से तीन बार उन्होंने करूर विधानसभा और दो बार अरावकुरीची सीट से जीत दर्ज की है। कभी अन्नाद्रमुक (AIADMK) के कद्दावर नेता रहे बालाजी अब DMK के लिए पश्चिमी तमिलनाडु (कोंगु बेल्ट) में सबसे बड़ा दांव बन गए हैं। पश्चिमी तमिलनाडु को पारंपरिक रूप से AIADMK का गढ़ माना जाता है। 2021 के चुनावों में, राज्य की सत्ता गंवाने के बावजूद AIADMK ने इस क्षेत्र की 50 में से 33 सीटें जीती थीं, जबकि DMK को केवल 18 सीटें मिली थीं।

Senthil Balaji को लेकर क्या है DMK की रणनीति?

DMK का मानना है कि सेंथिल बालाजी को कोयंबटूर में उतारने से पूरे पश्चिमी बेल्ट में एक रिपल इफेक्ट पैदा होगा। DMK प्रवक्ता ने कहा कि, सेंथिल बालाजी अपनी सांगठनिक क्षमता और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उन्हें कोयंबटूर दक्षिण से उतारना मुख्यमंत्री स्टालिन की एक सोची-समझी रणनीति है। इससे न केवल कोयंबटूर, बल्कि आसपास के जिलों में भी पार्टी मजबूत होगी।

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विपक्षी दलों ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। AIADMK और BJP का दावा है कि बालाजी करूर में अपनी जमीन खो चुके हैं। AIADMK पार्टी प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा, यह कोई रणनीति नहीं है। सेंथिल बालाजी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और जनता के गुस्से का सामना कर रहे हैं, इसलिए वे करूर से भाग रहे हैं। वे यहां धनबल का इस्तेमाल करना चाहते हैं लेकिन कोयंबटूर में यह नहीं चलेगा।

2021 में कोयंबटूर दक्षिण सीट जीतने वालीं BJP नेता वानाती श्रीनिवासन ने इस फैसले को हताशा भरा बताया। उन्होंने कहा कि DMK के पास स्थानीय नेतृत्व की कमी है, इसलिए वे एक 'विवादित' नेता को पैराशूट के जरिए उतार रहे हैं।

सेंथिल बालाजी का विवादों से पुराना रहा है नाता

सेंथिल बालाजी का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। 2011-2015 के दौरान उन पर कैश फॉर जॉब स्कैम (जब वे AIADMK सरकार में परिवहन मंत्री थे) सरकारी नौकरियों के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा। जून 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था और उन्होंने एक साल से अधिक समय जेल में बिताया।

जमानत पर बाहर आने के बाद उन्हें फिर से कैबिनेट में शामिल किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जमानत और मंत्री पद एक साथ नहीं चल सकते। सेंथिल बालाजी के लिए यह चुनाव केवल एक सीट जीतने की लड़ाई नहीं है बल्कि अपनी राजनीतिक साख बचाने का भी संघर्ष है।

यदि वे AIADMK के इस मजबूत किले को ढहाने में कामयाब होते हैं तो वे DMK के भीतर निर्विवाद रूप से 'कोंगु बेल्ट' के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे। लेकिन यदि नतीजा विपरीत रहा तो उनकी राजनीतिक राह और भी कठिन हो जाएगी।

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